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Shimla: चरस रखने के अपराध के लिए हिमाचल हाईकोर्ट ने घटाई सजा

Fri, 25 Nov 2022 05:55 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया की अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी से पकड़ी गई चरस की मात्रा को साबित करने में नाकाम रहा है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के जुर्म के लिए सुनाई सजा को घटा दिया। विशेष न्यायाधीश चंबा ने 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने आरोपी को एक वर्ष की सजा सुनाई। जुर्माने की सजा को अदालत ने रद्द कर दिया। एक वर्ष से ज्यादा कारावास काटने पर अदालत ने चुन्नी लाल को रिहा करने के आदेश दिए हैं। 19 नवंबर 2017 को पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान दारूनाला पुल से आरोपी को 1.6 किलोग्राम चरस के साथ पकड़ा था। अभियोजन पक्ष ने विशेष न्यायाधीश चंबा की अदालत के समक्ष चालान पेश किया।

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अदालत ने आरोपी को चरस रखने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया की अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी से पकड़ी गई चरस की मात्रा को साबित करने में नाकाम रहा है। अभियोजन पक्ष के सबूतों से सिर्फ यह साबित होता है कि आरोपी से 26 ग्राम चरस ही पकड़ी गई, जिसे सैंपल के तौर पर परीक्षण के लिए भेजा गया था। 

कच्ची शराब बनाने के आरोपी की सजा हाईकोर्ट से बरकरार 
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कच्ची शराब बनाने के आरोपी की सजा बरकरार रखी है। निचली अदालत ने नैन सिंह को एक वर्ष की कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। मामले के अनुसार 5 जनवरी 2007 को पुलिस टीम टिक्कर गांव की तरफ गश्त पर थी। रास्ते में उन्होंने नाले से धुआं उठता देखा। मौके पर पुलिस ने आरोपी को 150 लीटर कच्ची शराब के साथ पकड़ा। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने के लिए सात गवाहों के बयान दर्ज करवाए। निचली अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ जुर्म साबित करने में सफल रहा। निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायाधीश सिरमौर के समक्ष चुनौती दी थी। सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उसे सुनाई गई सजा बरकरार रखी थी। उसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी।

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