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MC Shimla Election Update: नगर निगम शिमला के पांच वार्डों के पुनर्सीमांकन पर हिमाचल हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Tue, 12 Jul 2022 10:27 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला के चुनाव के लिए पांच वार्डों के पुनर्सीमांकन पर रोक लगा दी है। सिम्मी नंदा और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किए हैं। 
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हिमाचल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला के चुनाव के लिए पांच वार्डों के पुनर्सीमांकन पर रोक लगा दी है। सिम्मी नंदा और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किए हैं। न्यायालय ने 16 अगस्त तक राज्य सरकार, मंडलीय आयुक्त, उपायुक्त शिमला और राज्य चुनाव आयोग से जवाब-तलब किया है। याचिका में कहा है कि नाभा, फागली, टुटीकंडी, समरहिल और बालूगंज वार्डों का पुनर्सीमांकन मनमाने तरीके से किया है।

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फागली और टुटीकंडी वार्डों के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए नाभा वार्ड के क्षेत्र को कम कर दिया है। पहले की अपेक्षा अब नाभा वार्ड आधा रह गया। फागली वार्ड को इतना बड़ा कर दिया कि नगर निगम के सभी वार्डों की अपेक्षा फागली वार्ड का क्षेत्र अधिक हो गया। इसके अलावा बालूगंज वार्ड का वह क्षेत्र भी समरहिल में मिला दिया जोकि बालूगंज के नाम से ही जाना जाता है। 

  याचिकाकर्ता का आरोप है कि राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इन वार्डों का पुनर्सीमांकन किया है जोकि कानून की दृष्टि से गलत है। प्रार्थी ने 24 जून 2022 व 8 जुलाई 2022 को मंडलीय आयुक्त शिमला और उपायुक्त शिमला द्वारा पारित आदेशों को रद्द करने की न्यायालय से गुहार लगाई है।

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पीजीटी आईपी मामले की सुनवाई  इस दिन

कंप्यूटर प्रोफेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष सेवल ने बताया कि प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित पीजीटी आईपी केस की सुनवाई 14 जुलाई को होने जा रही है। इस पर प्रदेश के 40,000 से अधिक कंप्यूटर शिक्षित युवाओं की नजर है। एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखकर पीजीटी आईपी के मामले को जल्द निपटाने और प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 850 से अधिक रिक्त पड़े प्रवक्ता कंप्यूटर साइंस के पदों को भरने की अधिसूचना जल्द जारी करने की मांग की है।

एसोसिएशन के सचिव प्रवीण मेघटा ने बताया कि बीते पांच वर्षों से लंबित इस मामले की सुनवाई इससे पूर्व तीन जून को हुई थी। संभावना है कि 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई में इस केस का फैसला हो सकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1,100 से अधिक पदों को भरने की अधिसूचना जारी की थी। इसमें पांच वर्ष के शैक्षणिक अनुभव की शर्त को जोड़ दिया गया था जबकि ऐसी शर्त किसी भी अन्य विषय में नहीं रखी गई। इसी शर्त को न्यायालय में वर्ष 2017 में चुनौती दी गई थी लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं आ सका है। 
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