हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई को गुड़िया मामले और इसी से जुड़े हिरासत में हत्याकांड की जांच को दो हफ्ते में पूरा करने के आदेश जारी किए हैं।
सीबीआई ने राज्य उच्च न्यायालय से इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए चार सप्ताह का वक्त मांगा तो हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए इससे इंकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में डीजीपी समेत नौ पुलिस अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया है। इन्हें शुक्रवार को कोर्ट में भी तलब किया है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी होगी।
रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने की बात कही
प्रदेश उच्च न्यायालय में कोटखाई के गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में अपनी जांच की अतिरिक्त स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की। अदालत ने वीरवार को प्रस्तुत रिपोर्ट और दो अगस्त को पेश की गई सीबीआई स्टेटस रिपोर्ट दोनों को ही पढ़ा।
सीबीआई ने अदालत से पहला आग्रह किया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने इसे मान लिया। दूसरे आग्रह में सीबीआई ने जांच पूरी करने के लिए चार हफ्तों की मोहलत मांगी जिसे अदालत ने नकार दिया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई चार हफ्तों से इस मामले की जांच कर रही है, जबकि मामले के रिकार्ड के मुताबिक यह कहीं भी पता नहीं चल रहा है कि सीबीआई ने इस प्रकरण की शीघ्रता से जांच के लिए कोई कारगर कदम उठाए हैं।
कोर्ट ने सीबीआई को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय देते हुए मामले की जांच शीघ्रता से पूरी करने के आदेश दिए।
इन पुलिस अफसरों को प्रतिवादी बनाने के आदेश जारी
एएसपी भजन देव नेगी और आईजी जहूर जैदी हाईकोर्ट में पेश होने के लिए जाते हुए।
कोर्ट ने डीजीपी सोमेश गोयल सहित तत्कालीन एसआईटी प्रमुख आईजी जहूर जैदी, एसआईटी सदस्य एएसपी भजन देव नेगी, डीएसपी रतन सिंह नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी, सब इंस्पेक्टर धर्मसेन नेगी, एएसआई राजीव कुमार, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंद्र सिंह और एएसआई दीप चंद को प्रतिवादी बनाने के आदेश जारी कर दिए।
इन प्रतिवादियों को शुक्रवार अदालत में हाजिर रहने के आदेश हुए हैं। अदालत ने कहा उक्त अधिकारी और एसआईटी सदस्यों को छह जुलाई से 23 जुलाई तक मामले की जांच से जुड़ी क्या क्या जानकारी मालूम है, उन्हें प्रतिवादी बनाए जाने से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगा।