हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा के चौगान के चारों तरफ अवैध निर्माण किए जाने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने चंबा प्लानिंग क्षेत्र में विकास योजना का उल्लंघन कर बनाए गए सभी निर्माणों को गिराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि यह आदेश विशेष परिस्थितियों में जारी किए जा रहे हैं और अवैध कब्जे हटाते समय नगर निगम अधिनियम के तहत प्रक्रिया को अपनाने की कोई जरूरत नहीं है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मुख्य सचिव सहित प्रधान सचिव नगर नियोजन, डीसी चंबा और नगर परिषद चंबा से अवैध निर्माण पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण पाए जाने पर एक माह के भीतर नोटिस जारी करने से लेकर जांच की प्रक्रिया पूरी की जाए। उसके बाद व्यक्ति विशेष अथवा सरकारी विभाग की ओर से किए गए अवैध निर्माण और कब्जों को हटाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट ने संबंधित दीवानी, राजस्व और अन्य अदालतों को हाईकोर्ट के आदेशों पर अमल को लेकर कार्रवाई के खिलाफ मामले पंजीकृत न करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई 19 जून को निर्धारित की गई है।
पद्म श्री पुरस्कार विजेता विजय शर्मा की ओर से मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर अदालत ने संज्ञान लिया है। पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद चंबा की ओर से चौगान के चारों तरफ दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। जबकि, राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2007 में जारी अधिसूचना के तहत चंबा के चौगान के चारों तरफ किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई गई है। यह भी आरोप लगाया गया है कि इस अवैध निर्माण से चौगान को नुकसान पहुंच रहा है।