हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला की परिधि में पार्किंग और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार और नगर निगम को दो माह के भीतर विस्तृत पेड पार्किंग स्कीम तैयार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने शिमला नगर निगम के तहत चिन्हित स्थानों पर उपलब्ध पार्किंग की जानकारी एक मैप के माध्यम से अपनी वेबसाइट पर डालने के आदेश भी दिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि शिमला के प्रत्येक सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली पार्किंग में फीस तय की जाए। कोर्ट ने नो पार्किंग क्षेत्रों में पार्क गाड़ियों पर भारी से भारी जुर्माना लगाने को कहा। शिमला की छोटी-बड़ी सड़कों के किनारे या तो पेड पार्किंग अधिकृत हो या कोई पार्किंग ही न हो। कोर्ट ने संजौली निवासी प्रेमराज और अन्यों द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश पारित किए।
अवैध पार्किंग से बंद हो गया था एंबुलेंस रोड
प्रार्थियों की ओर से दायर याचिका में कहा था कि बार-बार आग्रह करने के बाद भी संजौली-सिमिट्री टनल से ढिंगू बावढ़ी एंबुलेंस रोड पर की जाने वाली अवैध पार्किंग को बंद करवाया जाए। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया गया। इस कारण अस्पताल ले जाने के लिए मरीजों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
कई बार तो रात को लोगों को गाड़ी की बजाय मरीज को पैदल ही उस रोड से ले जाना पड़ता है। कहा कि जिस उद्देश्य के लिए रोड का निर्माण किया है, उस तरह उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। हालांकि कोर्ट के आदेशों के बाद स्थानीय प्रशासन ने इस सड़क को नो पार्किंग एरिया घोषित कर दिया गया है।
बंद हो मुफ्तखोरी, अवैध पार्किंग पर हो जुर्माना : कोर्ट
कोर्ट ने शिमला शहर में पार्किंग और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए कहा कि निगम की परिधि में जहां कहीं भी पार्किंग की छूट दी जाए वह मुफ्त न हो। इस तरह की मुफ्तखोरी बंद होनी चाहिए। अवैध पार्किंग वालों से भारी जुर्माना वसूला जाए ताकि वह ऐसा करने से पहले कई बार सोचे।
कोर्ट ने अपने आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए सरकार और निगम को दो माह के भीतर तैयार की गई विस्तृत स्कीम का ब्यौरा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।