गुड़िया मामले की जांच सीबीआई को देने के बाद अब हिमाचल हाईकोर्ट ने फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत मामले की जांच भी सीबीआई को देने के आदेश दिए हैं। बहुचर्चित इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से हिमाचल पुलिस को एक और बड़ा झटका लगा है।
बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान होशियार सिंह की मौत और इससे जुड़े अवैध वन कटान से जुड़ी दोनों एफआईआर की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करने के निर्देश दिए हैं।
इसमें एसपी और डीएसपी रैंक के तीन अधिकारी शामिल करने को कहा गया है।। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि वो मामले की जांच में सीबीआई की हर संभव सहायता करे। सीआईडी ने मामले में जो भी सबूत एकत्र किए हैं उन्हें सीबीआई को सौंपा जाए।
एमिकस क्यूरी ने उठाए थे कई गंभीर सवाल
हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में संज्ञान लेने के बाद मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी पीएल मेहता ने एसआईटी और पुलिसिया जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। हाईकोर्ट में पेश सुझावों में एमिकस क्यूरी ने जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि होशियार सिंह द्वारा कथित तौर पर खाया गया जहर कहां से आया? किसने बेचा? किसने खरीदा?
यह जांच के विषय में नहीं जोड़ा गया। जांच में पाया गया कि होशियार सिंह ने 5 जून को सुबह करीब पौने 9 बजे एक टीजीटी मास्टर के घर दाल चावल, सलाद और आलू मटर खाए थे, जबकि 10 तारीख को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी होशियार सिंह के पेट में यही पदार्थ पाए गए। डॉक्टरों के ओपिनियन के अनुसार पेट में खाना 4 से 6 घटों में पच जाता है।
अगर जहर खाया हो तो यह प्रक्रिया कुछ और देरी से पूरी होती है। एमिकस क्यूरी के अनुसार होशियार सिंह की मौत के समय की पुख्ता जानकारी होना जरूरी है। इससे मौत की असल वजह जानने में बहुत हद तक मदद मिलेगी। 5 से 9 जून के बीच घटनास्थल पर बारिश हुई या नहीं इसकी भी जांच नहीं की गई।
इसका सीधा संबंध उल्टियों के धुलने से हो सकता है। वन माफियाओं पर अभी तक कोई कड़ी कार्यवाई नहीं हुई और न ही कोई बड़ी गिरफ्तारी, जिससे इस मौत की असल वजह का पता चल सके।
सेरी कतांडा बीट में मिले थे देवदार के ताजा ठूंठ
होशियार सिंह की डायरी में लिखी अवैध कटान की घटनाओं पर वन विभाग की टीम ने सेरी कतांडा बीट का निरीक्षण किया था। इस दौरान यहां वन विभाग की टीम को करोड़ों की कीमत के देवदार के 68 पेड़ों के ताजा ठूंठ मिले थे। टीम ने सड़क के नजदीक छिपाए 20 से अधिक देवदार के स्लीपर भी बरामद किए।
डायरी में बताई गई अन्य जगहों पर भी टीम ने दबिश दी थी और लोटरानाला के पास भी कई पेड़ों के ठूंठ बरामद किए। होशियार सिंह ने अपनी डायरी में बताया है कि बीट में कई जगह लकड़ी काटने के कटर छिपाए हुए हैं।
स्थानीय जनता ने करसोग क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटान होने की सूचना संबंधित बीट के अफसरों को न होने पर भी कई सवाल खड़े किए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने मांग की थी कि होशियार सिंह की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए।
पुलिस ने हत्या से आत्महत्या में बदला केस
फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत और उसकी डायरी में करसोग क्षेत्र में अवैध वन कटान से जुड़ी खबरें प्रकाशित की गई थीं। 9 जून को होशियार सिंह का शव गुरजब जंगल में पेड़ पर उल्टा लटका हुआ मिला था।
पहले इस मामले में धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जल्दबाजी दिखाते हुए अगले ही दिन इसे आत्महत्या के मामले में बदल दिया।