प्रदेश के निजी स्कूलों में फीस निर्धारण को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव शिक्षा से शपथपत्र के माध्यम से जानकारी देने को कहा है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रधान सचिव शिक्षा से पूछा है कि हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 के अंतर्गत निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए क्या कारगर कदम उठाए हैं।
इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू कराने के लिए किस अधिकारी को अधिकृत गया है। शिमला वासियों ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा हर वर्ष स्कूलों की फीस में बढ़ोतरी की जाती है। शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है।
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इस कारण केवल अमीर लोगों के बच्चे ही इन स्कूलों से शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं। शिमला वासियों ने उचित शिक्षा पद्धति को लागू करवाने की हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।
इसके अलावा हाईकोर्ट से यह भी गुहार लगाई है कि निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूलने पर रोक लगाने के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए जाएं। मामले पर सुनवाई 20 दिसंबर 2017 को होगी।
लोक निर्माण विभाग, डीसी कांगड़ा और एसपी से जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने ज्वालाजी से चंबा पत्तन सड़क के निर्माण कार्य के कारण स्थानीय निवासियों को होने वाली परेशानियों के दृष्टिगत लोक निर्माण विभाग, जिलाधीश कांगड़ा और पुलिस अधीक्षक कांगड़ा से जवाब तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने भनियारा के बाशिंदों की ओर से हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेने के बाद यह आदेश पारित किए। मामले पर सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
पत्र के अनुसार ज्वालाजी से चंबा पत्तन सड़क का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से किया जा रहा है। मगर उसके साथ नालियां अभी तक नहीं बनाई गई हैं। जो नालियां पहले से बनी हुई हैं, वह भी इस समय मिट्टी से भर गई हैं। इस कारण पानी की निकासी सही रूप से नहीं हो रही है।
भारी बरसात के कारण सारा पानी सड़क से गुजरता है, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। भनियारा गांव में एक बावड़ी है। जब पानी का बहाव ज्यादा होता है तो सारा गंदा पानी उसी बावड़ी में चला जाता है। इससे पानी पीने योग्य नहीं रहता है। बारिश के दौरान ठीक प्रकार से निकासी न होने के कारण घरों में भी पानी घुस जाता है।
भनियारा निवासियों को इस कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्राम वासियों ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि लोक निर्माण विभाग और अन्य सक्षम अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी किए जाएं, जिससे समस्या का हल हो सके।
वृद्धावस्था पेंशन न मिलने पर डाक विभाग को नोटिस
हाईकोर्ट ने शिमला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में समय से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलने के मामले में डाक विभाग और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने जिले के रोहडू, जुब्बल, चौपाल और ठियोग तहसील के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले वृद्धों को वृद्धावस्था पेंशन न मिलने को लेकर लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार सहित हिमाचल सर्कल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। मामले पर सुनवाई 15 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने रोहड़ू तहसील के गांव लरोट निवासी परजा देवी और बलासु देवी, खरशाली के भजन दास, ठाकुर सैन और चैन राम, खबल से रतनी देवी, लींगन से गोपाल सिंह तथा चिड़गांव से भाग मल द्वारा संयुक्त रूप से लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए ये आदेश पारित किए।
प्रार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रदेश सरकार के वेलफेयर विभाग द्वारा जारी की गई ओल्ड एज व विधवा पेंशन इस वर्ष मार्च महीने से नहीं मिली है। जब उन्होंने वेलफेयर विभाग से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि उनकी पेंशन राशि विभाग ने डाक विभाग के पास वितरण के लिए मार्च में जमा करवा रखी है।
यह व्यवस्था ऑनलाइन होने तथा गांव के पोस्ट ऑफिस में कम पढ़े-लिखे स्टाफ और कंप्यूटर प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण शिमला जिला के रोहड़ू, जुब्बल, चौपाल और ठियोग इलाकों के डाकघरों में वितरण के लिए लंबित है। प्रार्थियों ने मांग की है कि चीफ पोस्टमास्टर जनरल हिमाचल सरकार को तलब कर उनकी ओल्ड एज तथा विधवा पेंशन वितरण करवाने के आदेश दिए जाएं।
राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के आदेशों की अनुपालना न करने पर पिछड़ा वर्ग आयोग के विशेष सचिव संजीव भटनागर को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। ट्रिब्यूनल ने पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाए।
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल अध्यक्ष न्यायाधीश वीके शर्मा और प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने प्रतिभा ठाकुर द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद ये आदेश पारित किए।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी प्रतिभा ठाकुर ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अनुसंधान अधिकारी के पद के लिए हो रही भर्ती को चुनौती दी थी।
ट्रिब्यूनल ने 10 अप्रैल 2017 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए यथास्थिति बनाने के आदेश पारित किए थे, लेकिन प्रतिवादी ने इन आदेशों को न मानते हुए अंजना कुमारी को अनुसंधान अधिकारी के पद पर नियुक्ति दे दी। मामले पर सुनवाई पहली जनवरी 2018 को होगी।