अदालत ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ए) के तहत बिना विभागीय जांच के की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई को पूरी तरह से वैध ठहराया है। यह संयुक्त निर्णय न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता गौरव वर्मा और अक्षय चौहान की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
गौरतलब है कि पहले मामले में याचिकाकर्ता वर्ष 2009 में कांस्टेबल नियुक्त हुए। 2016 में थाना बल्ह (मंडी) में 1,003 ग्राम चरस की बरामदगी के आरोप में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत मामला दर्ज हुआ। ट्रायल कोर्ट स्पेशल जज, मंडी ने दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और 25,000 का जुर्माना सुनाया। एक अन्य मामले में याचिकाकर्ता वर्ष 2015 में खेल कोटे के तहत कांस्टेबल नियुक्त हुआ। 2019 में थाना भुंतर में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई। ट्रायल कोर्ट (स्पेशल जज-II, रामपुर बुशहर) ने 26 दिसंबर 2023 को उसे दोषी ठहराया। दोनों याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि हाईकोर्ट में आपराधिक अपील लंबित है और उनकी सजा निलंबित कर दी गई है। तर्क दिया कि डीजीपी अनुशासनात्मक प्राधिकरण नहीं हैं।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 311(2)(ए) सक्षम प्राधिकारी को आपराधिक मामले में सजा मिलने पर बिना जांच के बर्खास्त करने का अधिकार देता है। सजा का निलंबन केवल जेल जाने पर रोक लगाता है, इससे दोषसिद्धि खत्म या स्थगित नहीं होती। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट की ओर से आपराधिक अपील में केवल सजा का निलंबन किया गया था, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई थी। जब तक अपीलीय अदालत दोषसिद्धि को रद्द नहीं कर देती, तब तक बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह से वैध रहता है।
गगल हवाई अड्डा विस्तार मामले में कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा स्थित गगल हवाई अड्डा विस्तार मामले में सभी पक्षों की दलीलों के सुनने के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रख दिया है। इस मामले को सुनवाई के लिए कुल 92 बार न्यायालय में सूचीबद्ध किया गया। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। गौरतलब है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने कांगड़ा (गगल) हवाई अड्डे के विकास की योजना दो चरणों में तैयार की है। याचिका में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि प्रस्तावित निर्माण क्षेत्र हाल ही में भारी बाढ़ और भूस्खलन का गवाह रहा है। यह पूरा क्षेत्र अत्यधिक भूकंप संभावित क्षेत्र में आता है। सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एएआई ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि राज्य सरकार परियोजना की वित्तीय व्यावहारिकता की दोबारा जांच करे। इसके अलावा सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनमें से कुछ मामलों में भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने अवाॅर्ड भी पारित कर दिया है। याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि सरकार ने हवाई अड्डे को बनाने के लिए जरूरी अनुमतियां नहीं ली हैं।