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Himachal High Court: जिन्हें कानून का ज्ञान, वे अज्ञानता का ढोंग नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी

Thu, 22 Sep 2022 10:11 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उन्हें कानून का पर्याप्त ज्ञान है, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अज्ञानता का ढोंग नहीं कर सकते हैं। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और सचिव कार्मिक की कार्यप्रणाली पर कड़ी प्रतिकूल टिप्पणी की है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि उन्हें कानून का पर्याप्त ज्ञान है, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अज्ञानता का ढोंग नहीं कर सकते हैं। याचिकाकर्ता को फजूल में ही मुकदमेबाजी में घसीटने का व्यवहार किया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने सुरक्षा रांटा की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें वर्ष 2009 से 2015 तक सारे वित्तीय लाभ 30 दिन के भीतर देने के आदेश दिए हैं। देरी होने पर नौ फीसदी ब्याज देना होगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों की अनुपालना 27 अक्तूबर के लिए तलब की है। 

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याचिकाकर्ता अमित की माता सुरक्षा रांटा वर्ष 2000 से कांस्टेबल के पद पर थीं। वर्ष 2002 में उन्हें हेड कांस्टेबल पदोन्नत किया। वर्ष 2009 से उन्हें एएसआई के पद पर पदोन्नत करना था। उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने पर पदोन्नत नहीं किया गया। वर्ष 2015 मेें उन्हें आपराधिक मामले से बरी कर दिया। उसके बाद विभाग ने उन्हें वित्तीय लाभ से वंचित रखते हुए 2009 से पदोन्नत कर दिया। अदालत ने कहा कि विभाग का यह निर्णय गलत है। याचिकाकर्ता को वित्तीय लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता है। इसलिए उन्हें पिछले वित्तीय लाभ दिए जाएं।

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