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हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: बिना ठोस वजह पति से अलग रहना, बच्चों से बात नहीं करना मानसिक क्रूरता

Wed, 16 Sep 2026 07:17 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना किसी उचित कारण के पति का घर छोड़ना और अपने ही बच्चों से संपर्क तोड़ लेना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना किसी उचित कारण के पति का घर छोड़ना और अपने ही बच्चों से संपर्क तोड़ लेना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मामले की समीक्षा के बाद फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत पति को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की डिक्री दी गई थी। कोर्ट ने पत्नी की अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अपीलकर्ता और प्रतिवादी का विवाह 21 जून 2007 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ। शादी के बाद दोनों करीब 10 साल साथ रहे और उनके दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) पैदा हुए। 

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पति का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह बिना बताए मायके चली जाती थी और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देती। घर छोड़ने के बाद से पत्नी ने न तो अपने बच्चों से मिलने की कोशिश की और न ही फोन पर उनसे बात की। पत्नी ने कोर्ट में दलील दी कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उसके साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से यह साफ है कि दोनों पक्षकार सितंबर 2019 से अलग रह रहे हैं और उनके बीच वैवाहिक रिश्ते पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। पत्नी ने बिना किसी न्यायसंगत कारण के अपने वैवाहिक घर को छोड़ा। इसके साथ ही अपने खुद के मासूम बच्चों से दूरी बना लेना और उनसे बात तक न करना, पति और उसके परिवार के प्रति घोर मानसिक क्रूरता को दर्शाता है।
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