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जरूर पढ़ें, बेटियों के हक में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में भी बेटियां अब अपने पिता की संपत्ति की हकदार होंगी। हिमाचल हाईकोर्ट ने जनजातीय क्षेत्रों में चल रही प्रथा को गलत ठहराते हुए इस बारे महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने अपने फैसले में जनजातीय क्षेत्र में चल रही प्रथा को अनुचित ठहराते हुए कहा कि लड़कों की तर्ज पर लड़कियां भी अपने पिता की संपत्ति पाने का हक रखती हैं।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 38, 39 और 46 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। हिमाचल के चंबा जिला में वर्ष 1963 में राजपत्र में छपी रिपोर्ट के अनुसार 91 फीसदी हिंदू रहते हैं। इसी तरह किन्नौर में भी वर्ष 1971 की रिपोर्ट के अनुसार 91 फीसदी हिंदू रहते हैं। अदालत ने हिंदू सक्सेसन एक्ट के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए कहा कि कबायली क्षेत्रों की लड़कियों को भी पिता की संपत्ति पाने का अधिकार है।
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अभी यह है व्यवस्था

हिमाचल के जनजातीय जिला किन्नौर और लाहौल- स्पीति में आज भी पिता की संपत्ति पर बेटियों का अधिकार नहीं है। इन क्षेत्रों में पिता की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति पुत्रों को ही मिलती है। कोई पुत्र न होने की स्थिति में पिता के भाइयों या उनके पुत्रों को संपत्ति ट्रांसफर हो जाती है।

कस्टमरी लॉ वाजिब उल अर्ज की यह व्यवस्था यहां अभी भी लागू है। इसके चलते इन क्षेत्रों में हजारों महिलाएं पिता की संपत्ति के अधिकार से वंचित रहती हैं।

अमर उजाला ने उठाया था मसला- अमर उजाला ने भी इस संवेदनशील मसले को प्रमुखता से उठाया था। संपत्ति के अधिकार के लिए कई महिला संगठन भी प्रयासरत रहे हैं।
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