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स्मार्ट सिटी को लेकर केंद्र और राज्य को नोटिस

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राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी न बनाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, नगर निगम शिमला और नगर परिषद धर्मशाला को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। प्रार्थी नगर निगम शिमला के महापौर संजय चौहान की याचिका में शिमला के बजाए धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
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केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के सचिव, स्मार्ट सिटी मिशन के अतिरिक्त सचिव, हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव, अतिरिक्त सचिव शहरी विकास, आयुक्त नगर निगम शिमला और नगर परिषद धर्मशाला को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पूरे भारत में 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाया जाना है। हिमाचल प्रदेश से सिर्फ  एक शहर को चुना जाना है। ऐसे शहरों को चुनने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं।

शिमला को 85 और धर्मशाला को 87.5 प्वाइंट दिए

प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया है कि अतिरिक्त सचिव शहरी विकास की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शहर का चुनाव दिशा निर्देश को दरकिनार रख कर किया है। शिमला शहर को 85 और धर्मशाला को 87.5 प्वाइंट दिए गए। धर्मशाला को ही स्मार्ट सिटी बनाए जाने का प्रस्ताव भेजा है। आरोप लगाया गया है कि अतिरिक्त सचिव शहरी विकास ने बिना स्टेट लेवल स्क्रीनिंग कमेटी की अप्रूवल से भी धर्मशाला का नाम केंद्र सरकार को भेजा है।

प्रार्थी ने इसे गैर कानूनी, राजनीति से प्रेरित बताते हुए रद करने की गुहार लगाई है। प्रार्थी ने यह भी गुहार लगाई है कि यदि इसे रद नहीं किया जाता है तो शिमला शहर को भी स्मार्ट सिटी बनाए जाने का निर्णय लिया जाए। पूरे भारत में 100 में से 98 शहर ही चुने गए हैं। मामले की आगामी सुनवाई 8 अक्तूूबर को निर्धारित की गई है।
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डिफाल्टरों से जल्द टैक्स वसूले एमसी: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने शिमला शहर में हाउस टैक्स की वसूली में ढील बरतने को गंभीरता से लिया है। अदालत ने आयुक्त नगर शिमला, उपायुक्त शिमला और तहसीलदार रिकवरी को आदेश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से डिफाल्टरों के खिलाफ कार्यवाही करे। नगर निगम शिमला द्वारा चार सितंबर को दायर शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद नगर निगम ने 10,71,80,839 रुपये का गृह कर वसूल लिया है।

शेष 415 डिफाल्टरों से 86,91,715 रुपये गृह कर वसूला जाना है। अदालत ने मामले की आगामी सुनवाई तक ताजा रिपोर्ट दायर करने के आदेश भी दिए है। नगर निगम टैक्स डिफाल्टरों के खिलाफ नगर निगम ‘एमसी एक्ट 1994’ के तहत कार्रवाई करने का फैसला पहले ही ले चुका है। नगर निगम ने 31 मार्च 2012 तक लंबित टैक्स की वसूली के लिए डिफाल्टरों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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