हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता बिल्लू ने अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग ही नहीं बल्कि, उस टेंडर को चुनौती दी है, जिसमें उसने भाग ही नहीं लिया। खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी ठेकेदार को अदालत में बेवजह घसीटने की कार्य किया है। नगर परिषद मनाली ने घर-घर से कूड़ा एकत्र करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि टेंडर आवंटित करने से पहले प्रतिवादियों ने हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया।
नगर परिषद ने नियमानुसार दो अखबारों में टेंडर नोटिस नहीं छापा। साथ ही प्रतिवादी ठेकेदार ने शर्तों के अनुसार 15 अक्तूबर 2022 तक गाड़ियां नहीं खरीदीं। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि परिषद ने दो अखबारों में नोटिस छापने के लिए भेजा था। एक ने इसे छाप दिया और दूसरे ने इसे प्रकाशित करना उचित नहीं समझा। अदालत ने कहा कि इसके लिए परिषद को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ठेकेदार पर लगाए गए आरोपों को भी अदालत ने निराधार पाया। रिकॉर्ड के अनुसार ठेकेदार ने 85 लाख रुपये की 8 गाड़ियां खरीदीं और पहली नवंबर तक इनमें टेंडर नियमों में जरूरी बदलाव भी किए।
जंगी-थोपन प्रोजेक्ट मामले पर 6 दिसंबर को सुनवाई
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जंगी-थोपन मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने अडाणी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलें सुनवाई के लिए मंजूर कर ली हैं। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अडाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट अडाणी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा किए। बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अडाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अडाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अडाणी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया।