हाईकोर्ट में अवैध भवनों को नियमित करने के लिए बनाए गए संशोधित कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई 12 सितंबर तक टाल दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष अभिमन्यु राठौर और अन्यों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है।
इस संशोधित कानून के तहत नियमितीकरण के लिए संबंधित लोगों को 60 दिनों का समय देते हुए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन के साथ 1000 की फीस भी मांगी गई है। इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है।
इसमें जैसा है जहां है वाली नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना है। इस पॉलिसी का लाभ लेने वालों को किसी क्वालीफाइड स्ट्रक्चरल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफि केट आवेदन के साथ लगाना भी जरूरी किया गया है।
ग्रीन और हेरिटेज क्षेत्रों में इस कानून को लागू नहीं किया गया है। जो भवन इस संशोधित कानून के तहत भी नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं होंगे, उनके बिजली पानी के कनेक्शन काटने और उन्हें गिराने का प्रावधान भी इसमें बनाया गया है
नियमितीकरण फीस भी 400 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। प्रार्थियों ने इस कानून को अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वाला बताकर चुनौती दी है।