याचिकाकर्ता भुवन कुमार एक कंसलटेंट के रूप में काम करता था। उसने शिकायतकर्ता की मुलाकात आकाश कुमार नाम के व्यक्ति से कराई, ताकि वह सब्सिडी का लाभ लेने के लिए फायर डिपार्टमेंट (अग्निशमन विभाग) और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) से अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलवा सके। इस काम के लिए दो लाख लिए गए, जो भुवन कुमार के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए। जांच में यह भी सामने आया कि जो एनओसी दी गई, वह पूरी तरह फर्जी और जाली थी। इसके बाद 25 फरवरी 2022 को पुलिस थाना मानपुरा (बद्दी)में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी और शिकायतकर्ता ने आपस में समझौता कर लिया। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि पैसे वापस मिलने के बाद वो केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।