हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस को आदेश दिए कि हर उस व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करें, जिसके घर, कमरे, एनक्लोजर, स्पेस, स्थान, पशु, गाड़ी इत्यादि को चरस रखने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने इन सभी लोगों के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 25 के तहत मामला बनाने और इस धारा के अंतर्गत सजा देने के आदेश जारी किए हैं।
कोर्ट ने प्रधान सचिव गृह को आदेश दिए है कि वह प्रदेश के सभी जांच अधिकारियों को न्यायालय के आदेशों बाबत सूचित करे और इन आदेशों की अक्षरश: अनुपालना सुनिश्चित करे।
चरस रखने की दोषी महिला को 15 साल कैद
हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के मलाणा की महिला दासी देवी को 1 किलो 500 ग्राम चरस रखने का दोषी ठहराते हुए 15 साल के कठोर कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने विशेष न्यायाधीश कुल्लू के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किए।
24 जनवरी, 2011 को पुलिस ने दोषी से 1 किलो 500 ग्राम चरस बरामद की थी। मामला दर्ज होने पर दोषी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20 के तहत विशेष जज कुल्लू के समक्ष मुकद्दमा चलाया गया था।
6 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोषी का दोष साबित नहीं कर पाया। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसे स्वीकार कर कोर्ट ने दासी देवी को चरस रखने का दोषी ठहराते हुए सजा का फैसला सुनाया।
ड्यूटी में लापरवाही पर फॉरेस्ट गार्ड को पांच साल कैद
हाईकोर्ट ने वन विभाग से निलंबित फॉरेस्ट गार्ड रत्न चंद को नौकरी के दौरान ड्यूटी में कोताही बरतने और आपराधिक विश्वास हनन के जुर्म का दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष कठोर कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश
सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने रत्न चंद को हिमाचल प्रदेश प्रीवेंशन ऑफ स्पेसिफिक करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट 1983 की धारा 14 के तहत 2 साल और भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत दोषी पाते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
रत्न चंद ठियोग तहसील के जनाहन में 21 अगस्त, 2000 से 30 मई, 2003 तक फॉरेस्ट गार्ड तैनात था। ऐसे में उसका यह कर्त्तव्य बनता था कि वह अपने इलाके के वनों की रक्षा करता और पेड़ों को अवैध कटान से बचाता। दोषी अपनी सेवाओं को ढंग से नहीं निभा सका। इस कारण जनवरी 2003 से मार्च 2003 तक उस क्षेत्र में 46 देवदार के पेड़ काटने के मामले सामने आए।
अवैध ढंग से काटे गए पेड़ों की जब्त लकड़ी में से 9 लाख 72 हजार रुपये की कीमत की लकड़ी का चोरी होना भी बताया गया। जांच के दौरान पाया कि दोषी फॉरेस्ट गार्ड उस समय ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। मामले में रत्न चंद की संलिप्तता पाते हुए स्पेशल जज शिमला की अदालत में मुकदमा चलाया गया।
निचली अदालत में अभियोजन पक्ष ने 14 गवाह और दोषी ने अपने बचाव में 2 गवाह पेश किए। 16 दिसंबर, 2009 को निचली अदालत ने उसे आरोपों से बरी कर दिया। सरकार ने 2010 में निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए दोषी को सजा सुनाई।
कोर्ट ने इसी मामले में वन भूमि से पेड़ों को काटने के बाद सेब बगीचे लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्यवाई करने के लिए सभी मामले ईडी को भी सौंपने के आदेश जारी किए हैं। इसी मामले में कोर्ट ने अवैध भवनों को नियमित करने के सरकारी प्रयासों पर न्यायिक संज्ञान लेते हुए इस प्रयास को गैरकानूनी ठहराया है।