हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने चार जनवरी 2014 को मंडी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान बरती कथित लापरवाही के मामले में संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने इस मामले में दो महत्वपूर्ण मुद्दों को तय किया।
न्यायालय इन मुद्दों पर अपना फैसला देगा कि क्या वास्तव में प्रार्थी का ऑपरेशन करने के दौरान डॉक्टरों की ओर से लापरवाही बरती गई है या नहीं। अगर बरती गई है तो उस प्रार्थी को मुआवजा दिया जाना चाहिए और कितना। इस मामले पर इस बाबत कार्यवाही करने से पहले न्यायालय ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य को आदेश जारी किए हैं कि वे इस मामले की स्वयं जांच करें और अपना शपथ पत्र न्यायालय के समक्ष दाखिल करें।
मामले पर सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की गई है। प्रार्थी ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में यह आरोप लगाया है कि चार साल पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस जोनल अस्पताल मंडी में उसका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। उसने सिजेरियन के बाद दो लड़कियों को जन्म दिया था। उसने आरोप लगाया है कि उसका ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों ने ऑपरेशन करते वक्त लापरवाही बरती। इस कारण वह 100 फीसदी अपंग हो गई है।
प्रार्थी के अनुसार चार सालों से उसके मां-बाप ही उसे उठाकर बाथरूम इत्यादि ले जाते हैं। दिनचर्या के कार्यों में मां-बाप ही उसकी मदद करते हैं। प्रार्थी के अनुसार वह दस जमा दो पास हैं और उसने कंप्यूटर का कोर्स भी किया है। उसका आय का कोई साधन नहीं है। वह अपनी दो बेटियों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। प्रार्थी ने अपना गुजारा करने और अपने बच्चों का गुजारा करने के लिए उचित मुआवजा दिलवाए जाने की प्रदेश हाई कोर्ट से गुहार लगाई है।