बजट सत्र के पहले दिन ही सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने इरादे साफ कर दिए। हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार अधिनियम की धारा 118 में सरलीकरण पर हंगामे के बाद सदन से वाकआउट के विपक्ष के दांव ने सत्ता पक्ष को पलटवार का मौका दिया। कांग्रेस के तेवरों पर पहली बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का रुख बेहद उग्र दिखा।
मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में विपक्ष को इसका खामियाजा झेलना होगा। सदन के भीतर की खटास बाहर भी दिखी। संभव है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कार्यकाल के कई दबे मुर्दे बाहर आएं।
सत्ता पक्ष को इस बात की टीस है कि जो मुद्दा अभी सिर्फ चर्चा और सुझावों के स्तर पर है, उसे इस ढंग से मुद्दा बनाना उचित नहीं है। उधर, विपक्ष ने साफ कर दिया है कि लगभग बीस दिनों के सत्र के दौरान सरकार को सदन में घेरने का कोई मौका नहीं चूकेंगे।
सरकार पर पहले दिन से हावी होने की रणनीति के साथ सदन में पहुंचे विपक्ष ने विवादों में रही धारा 118 को हमले के लिए चुना। उम्मीद के अनुरूप हंगामे के साथ बजट सत्र का आगाज हुआ। पहले दिन विपक्ष की जोरदार ओपनिंग की उम्मीद सत्ता पक्ष को नहीं थी।
विपक्ष ने जो विषय चुना वो सीधा जनता से जुड़ा था, लेकिन उस पर शोरशराबे और वाकआउट करने की जल्दबाजी अधिक दिखी। विपक्ष ने सदन में ऐसा कुछ नहीं रखा जो यह साबित करता हो कि सरकार धारा 118 में संशोधन करने जा रही है।
बयानबाजी को आधार बनाकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया जबकि सरकार फाइलों में इस प्रक्रिया से संबंधित कोई दिशा निर्देश सरकार की तरफ से हुआ, इसका कोई उल्लेख नहीं किया।
इसका फायदा सत्ता पक्ष को मिलता दिखा। वाकआउट के बाद सदन में सरकार को रूटीन का कामकाज निपटाने का मौका तो मिला बल्कि धारा 118 पर बने असमंजस से भी जयराम सरकार ने पर्दा उठाया। जयराम ने इसे शुरुआती चूक करार देते हुए विपक्ष को अल्टीमेटम तक दे डाला।
उन्होंने संकेत दिए कि कई मामले हैं, जिन पर जांच बैठाकर वे विपक्ष को शांत कर सकते हैं। जयराम सरकार की इस चेतावनी का विपक्ष पर क्या असर पड़ता है, इसका असर आने वाले दिनों में सदन के अंदर दिखेगा।