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Himachal High Court: अनुबंध महिला कर्मचारियों को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Sun, 12 Jul 2026 10:32 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारी भी मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। अदालत ने कहा कि यह वैधानिक अधिकार है और अनुबंध में प्रावधान नहीं होने के आधार पर इसे रोका नहीं जा सकता। विभाग को पूरे वेतन के साथ मातृत्व अवकाश देने के निर्देश दिए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत महिला कर्मचारी भी मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। अदालत ने कहा कि केवल अनुबंध में इसका उल्लेख न होने के आधार पर किसी भी महिला कर्मचारी को इस वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने इस मामले में यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

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मातृत्व अवकाश एक वैधानिक अधिकार, अनुबंध पर निर्भर नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश एक वैधानिक अधिकार है, जो किसी भी सेवा अनुबंध या समझौते की शर्तों पर निर्भर नहीं करता। यह गर्भवती महिलाओं को मातृत्व लाभ प्रदान करने के लिए नियोक्ता का कानूनी दायित्व है, जैसा कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा-27 में भी वर्णित है।

क्लर्क रंजना की याचिका पर कोर्ट का निर्णय
यह फैसला ईसीएचएस सेल कसौली में क्लर्क के पद पर तैनात रंजना की याचिका पर सुनाया गया। रंजना ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनके अनुबंध में इसका कोई प्रावधान नहीं है। अदालत ने विभाग के उन दोनों पत्रों को रद्द कर दिया, जिनके माध्यम से रंजना को मातृत्व अवकाश देने से इनकार किया गया था। कोर्ट ने प्रतिवादी विभाग को तत्काल पूरे वेतन के साथ मातृत्व अवकाश देने के निर्देश दिए।

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80 दिन की सेवा पर 26 हफ्ते का अवकाश
सुनवाई के दौरान अदालत ने रक्षा मंत्रालय और ईसीएचएस महानिदेशक द्वारा वर्ष 2019 में जारी निर्देशों का भी संज्ञान लिया। इन निर्देशों के अनुसार, नियमित और अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को, यदि उन्होंने साल में कम से कम 80 दिन की सेवा पूरी की हो, तो पूरे वेतन के साथ अधिकतम 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश का अधिकार है।

याचिकाकर्ता रंजना, जो वर्ष 2014 से लगातार अनुबंध पर सेवाएं दे रही हैं, इस शर्त को पूरा करती हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल मातृत्व अवकाश मांगने के आधार पर उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह फैसला उन लाखों महिला कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है जो अनुबंध पर काम कर रही हैं और जिन्हें अक्सर अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जाता है। यह निर्णय लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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