न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुमित शर्मा की याचिका में यह आदेश पारित किए। अदालत ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्रतिवादी को आवंटित किए गए आवास को दो अगस्त से पहले खाली करवाएं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव की सिफारिश पर किए गए सरकारी आवास आवंटन को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुमित शर्मा की याचिका में यह आदेश पारित किए। अदालत ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को आदेश दिए हैं कि वह प्रतिवादी को आवंटित किए गए आवास को दो अगस्त से पहले खाली करवाएं। याचिकाकर्ता को यह आवास सारी मूलभूत सुविधाओं के साथ 16 अगस्त तक आवंटित करने के आदेश दिए गए हैं।
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अदालत ने सरकार को आदेश दिए कि सरकारी कर्मचारियों को आवास आवंटन पारदर्शिता के साथ और नियमानुसार किया जाए। आवास आवंटन संबंधी सभी पूरे रिकॉर्ड को 24 घंटों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड करने के आदेश भी दिए हैं। अदालत ने अपने आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट आगामी 18 अगस्त के लिए तलब की है। याचिकाकर्ता सुमित शर्मा हाईकोर्ट में ड्राइवर के पद पर तैनात है। नाभा में उसे सरकारी आवास भी आवंटित किया गया है। 24 मार्च, 2021 को याचिकाकर्ता ने अपने सरकारी आवास को बदलने के लिए आवेदन किया था। दूसरी तरफ, राज्य सचिवालय में कार्यरत चालक ने भी 19 अगस्त, 2021 को आवास आवंटन के लिए आवेदन किया था।
मुख्य सचिव की सिफारिश पर 23 अगस्त, 2021 को उसे सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों को अपनी शक्तियों का प्रयोग जनता के हितों के लिए करना चाहिए। यदि सत्यता के मार्ग से हटकर अपनी शक्तियों का प्रयोग किया जाता है तो यह लोगों के भरोसे का उल्लंघन माना जाता है। न्यायपालिका का कर्तव्य है कि वह कानून क्षरण के बचाव में कानून शासन लागू करें। अदालत ने कहा कि राज्यों के पास निहित शक्तियों का प्रयोग सार्वजनिक और सामाजिक हित में किया जाना चाहिए। मनमाने ढंग से लिया गया निर्णय भाई-भतीजावाद और पक्षपात का उदाहरण बनता है।