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हिमाचल को देश की हेल्थ कैपिटल बनाना मुश्किल

Mon, 11 Jan 2016 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश को देश की हेल्थ कैपिटल बनाने की राह आसान नहीं है। कारण, स्टेट हेल्थ कमीशन की सिफारिशें लागू करने के लिए राज्य सरकार के पास बजट की कमी है। बीते साल अक्तूबर महीने में कमीशन ने हिमाचल के स्वास्थ्य पर रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में कई जरूरी प्रावधान करने को कहा गया है। साल 2025 तक हिमाचल को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अव्वल लाने की बात रिपोर्ट में कही गई है लेकिन इन सिफारिशों को लागू करने के लिए धनराशि की कमी आ रही है।
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स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि सूबे में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से फंडिंग करने की मांग की जाएगी। हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट को जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा हिमाचल से ताल्लुक रखते हैं, हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में वह हिमाचल की सभी जरूरतों से भली भांति परिचित हैं। उम्मीद है कि केंद्र सरकार हिमाचल को हेल्थ कमीशन की सिफारिशें लागू करने में बजट देकर सहयोग करेगी।

राज्य सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए अगस्त 2014 में स्टेट हेल्थ कमीशन का गठन किया था। अक्तूबर 2015 में कमीशन ने अपनी पहली रिपोर्ट सरकार को सौंपी। स्टेट हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट में नया स्वास्थ्य ढांचा तैयार करने के बजाए पुराना ढांचा मजबूत करने की सिफारिश की गई है।
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कमीशन ने अपनी अन्य सिफारिशों में कहा है कि अगले पांच सालों में सभी क्षेत्रीय व जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को पदोन्नत किया जाए। शिमला में लेवल वन का ट्रामा सेंटर, टांडा में लेवल टू का सेंटर, लेवल थ्री का सेंटर सभी क्षेत्रीय, जिला अस्पतालों और लेवल फोर का सेंटर सीएचसी स्तर पर खोला जाएगा।

सिरमौर और कांगड़ा जिला को आदर्श स्वास्थ्य देखभाल जिलों के रूप में विकसित किया जाए। सामाजिक बीमा प्रणाली के लिए सरकार की ओर से कार्य समूह गठित किया जाए। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को भी जोड़ा जाए। भारतीय जन स्वास्थ्य मानक की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए मौजूदा 48 उपजिला अस्पतालों को दुरुस्त किया जाए।

12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 100 बिस्तर वाले उप जिला अस्पतालों में पदोन्नत किया जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, पुराने रोगों की जांच और गुणवत्ता औषधालय सेवाओं के क्षेत्र में कार्य क्षमता हासिल की जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बच्चों की सामान्य बीमारियों के इलाज और लोगों की गंभीर बीमारियों के लिए स्वास्थ्य उप केंद्रों को सुदृढ़ किया जाए।
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