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UNESCO Report: हिमाचल के स्कूलों में पर्यावरण नहीं, जलवायु समाधान भी सीखेंगे छात्र; जानें विस्तार से

Sun, 12 Jul 2026 11:38 AM IST
Ankesh Dogra अनिमेष कौशल, शिमला।

सार

यूनेस्को ने हिमाचल के लिए ग्रीन एजुकेशन मॉडल सुझाया है, जिसके तहत विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन से निपटने की व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी। स्कूलों का मूल्यांकन भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु उत्तरदायित्व के आधार पर भी किया जा सकेगा।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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पहाड़ों पर बढ़ते भूस्खलन, सिकुड़ते ग्लेशियर, अनियमित बारिश और बार-बार आ रही अचानक बाढ़ की घटनाओं के बीच हिमाचल प्रदेश अब जलवायु शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए नई दिशा तय करने की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने अपनी ताजा रिपोर्ट घाटी की गूंज में हिमाचल के लिए शिक्षा मॉडल सुझाया है। यह मॉडल विद्यार्थियों को केवल पर्यावरण पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें जलवायु संकट को समझने और उससे निपटने के लिए व्यावहारिक रूप से तैयार करेगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि विभागीय अधिकारी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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यूनेस्को का मानना है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के केंद्र में स्थित हिमाचल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सबसे पहले और सबसे तीव्र रूप में महसूस कर रहा है। यही वजह है कि राज्य को ग्रीन एजुकेशन मॉडल विकसित करने के लिए आदर्श प्रयोगशाला माना गया है। रिपोर्ट में होल इंस्टीट्यूशन अप्रोच अपनाने की सिफारिश की गई है। इसके तहत स्कूल भवन, जल संरक्षण, ऊर्जा प्रबंधन, कचरा निस्तारण, जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। यानी छात्र किताबों में जलवायु परिवर्तन पढ़ने के साथ-साथ अपने स्कूल परिसर में ही उसके समाधान सीखेंगे। यूनेस्को और हिमाचल शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल एचपी फ्यूचर के तहत पिछले एक वर्ष में 12 जिलों के लगभग 200 स्कूलों में अध्ययन किया गया।

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इस दौरान 500 से अधिक शिक्षक और 10 हजार से ज्यादा विद्यार्थी इस पहल से जुड़े। रिपोर्ट में हिमाचल की मौजूदा पहलों की भी सराहना की गई है। राज्य में मिशन लाइफ के तहत 14 हजार से अधिक ईको क्लब सक्रिय हैं, जो विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

अब रिपोर्ट कार्ड में दिखेगी पर्यावरणीय जिम्मेदारी
यूनेस्को की महत्वपूर्ण सिफारिश हिमाचल के लिए अलग ग्रीन स्कूल क्वालिटी स्टैंडर्ड तैयार करना है। इसके तहत स्कूलों का मूल्यांकन केवल परीक्षा परिणामों और शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होगा, बल्कि जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, जैव विविधता संरक्षण, स्वच्छ परिसर और छात्रों की पर्यावरणीय जागरूकता जैसे मानकों पर भी किया जाएगा। यदि यह मॉडल लागू होता है तो हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां स्कूलों की गुणवत्ता का आकलन जलवायु उत्तरदायित्व के आधार पर भी किया जाएगा।
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