सरकार अवैध भवन मालिकों के खिलाफ सख्ती से पेश आएगी। अगर भवन मालिक निर्धारित समय में भवन नियमित करने के लिए आवेदन नहीं करते हैं तो उनका अवैध निर्माण तुड़वाया जाएगा। सरकार ने नए टीसीपी एक्ट में दोषियों के खिलाफ जेल तक का भी प्रावधान किया है। सरकार ने 30 मार्च तक आवेदन करने की तिथि निर्धारित की है।
इसके बाद सरकार तिथि बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। एक अप्रैल से प्रदेश सरकार हिमाचल में नियमित और अनियमित भवनों का सर्वे कराएगी। इसमें देखा जाएगा कि किन-किन अवैध भवन मालिकों ने पॉलिसी के तहत भवन नियमित करने के लिए आवेदन किया है। हिमाचल में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बिजली और पानी की सुविधा ली है लेकिन भवन नियमित करने के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सरकार सख्ती से पेश आएगी।
गौर हो कि सरकार ने लोगों को आवेदन करने के लिए 60 दिन का समय दिया था। अब आवेदन करने में महज 6 दिन बचे हैं। टीसीपी की मानें तो हिमाचल में अवैध भवनों को नियमित करने के लिए 8 पॉलिसी लाई गई हैं। इसमें यह पॉलिसी सबसे सस्ती है। प्रदेश सरकार ने भवन नियमित कराने के लिए टीसीपी और शहरी निकायों के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित की है।
शहरी क्षेत्रों में जिन भवन मालिकों का नक्शा पास है और उसके बाद अतिक्रमण किया है, उन्हें 800 रुपये जबकि टीसीपी एरिया में यह फीस 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी। शहरी क्षेत्रों में जिन लोगों ने बिना नक्शा भवन बनाया है, उन्हें 1000 रुपये और टीसीपी एरिया में यह फीस 500 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से वसूली जानी है।
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि अवैध भवनों को नियमित करने की यह अंतिम पॉलिसी होगी। लोगों को 30 मार्च से पहले भवन नियमित करने के लिए आवेदन करना होगा। सरकार तिथि बढ़ाने पर कोई विचार नहीं कर रही है। एक्ट में अवैध निर्माण को गिराए जाने का भी प्रावधान किया गया है।