चुनावी साल में हिमाचल सरकार सामाजिक सेवाओं पर फोकस करेगी। पिछले साल की तरह सरकार ने इस बार भी सामाजिक सेवाओं के लिए सबसे ज्यादा बजट रखा है। प्लान का करीब 38.83 फीसदी (2213.16 करोड़) बजट सामाजिक सेवाओं पर खर्च होगा। दूसरे नंबर पर ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन रखा गया है। इस पर 1073.52 करोड़ (18.83 प्रतिशत) रुपये खर्च होंगे।
कृषि क्षेत्र पर साल 2017-18 में सरकार 12.52 फीसदी यानी 713.66 करोड़ खर्च करेगी। पिछले साल कृषि क्षेत्र प्राथमिकता में चौथे नंबर पर था। सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में योजना बोर्ड की बैठक हुई। इसमें 5700 करोड़ के प्लान को मंजूरी दी गई।
इस साल की वार्षिक योजनामें पिछले साल की अपेक्षा 500 करोड़ (9.61 प्रतिशत) का इजाफा किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही केंद्र सरकार के नीति आयोग ने सालाना और पांच साल के प्लान को बंद कर दिया है लेकिन राज्य सरकार इस प्रक्रिया को जारी रखेगी। विधायक प्राथमिकता बैठकों और लोगों से मिले सुझावों को वार्षिक योजना में शामिल किया गया है।
सीमित संसाधनों के बीच वायदों को पूरा करेगी सरकार
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही सरकार के पास सीमित वित्तीय संसाधन हों, लेकिन कांग्रेस पार्टी घोषणापत्र के वायदों को पूरा करने का प्रयास कर रही है। सरकार विजन डॉक्यूमेंट 2030 को भी बनाने का काम कर रही है। इसमें सात साल के विकास की रणनीति और 3 साल का एक्शन प्लान होगा।
कहा कि स्कूलों में जल्द बायोमीट्रिक मशीनें लगाई जाएंगी। निरीक्षण निदेशालय से भी औचक निरीक्षण में मदद मिलेगी। बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों का एनरोलमेंट शहरी क्षेत्र की अपेक्षा बेहतर है, क्योंकि शहरों में लोग बच्चों को निजी स्कूलों में ज्यादा भेजते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए 682.70 करोड़ के प्लान को मंजूरी
प्लानिंग बोर्ड की बैठक में इस साल ऊर्जा क्षेत्र में 682.70 करोड़, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण पर 371.30 करोड़, सामान्य आर्थिक सेवाओं पर 267.35 करोड़, उद्योग एवं खनिज क्षेत्र पर 118.96 करोड़, ग्रामीण विकास पर 113.88 करोड़, सामान्य सेवा क्षेत्र पर 100.32 करोड़, विशेष क्षेत्र कार्यक्रम को 27.78 करोड़ और विज्ञान, तकनीक एवं पर्यावरण क्षेत्र के लिए 17.37 करोड़ के प्लान को मंजूरी दी है।
बैठक में प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर, आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल, 20 सूत्रीय कार्यक्रम के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर, पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया, मुख्य सचिव वीसी फारका, एसीएस वित्त श्रीकांत बाल्दी आदि उपस्थित थे।
सीमांत जिलों में बढ़ेगी निजी क्लीनिकों की निगरानी
सीएम ने कहा कि प्रदेश का लिंगानुपात राष्ट्रीय प्रतिशत की अपेक्षा बेहतर है। इसमें और सुधार लाने की जरूरत है। इसके लिए प्रदेश के बॉर्डर एरिया में स्थित निजी क्लीनिकों की सख्त निगरानी होगी। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा कि ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। लिंग परीक्षण रोकने को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।