साल 2016 से हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में नई शिक्षा नीति लागू होगी। स्कूली विषयों में कंप्यूटरीकरण और आधुनिकीकरण को शामिल किया जाएगा। प्रदेश में अभी साल 1986 की शिक्षा नीति के तहत शिक्षा का ढांचा चल रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली बच्चों को आधुनिक, नवीन और प्रायोगिक जानकारियां दी जाएंगी।
बीते माह इसको लेकर केंद्र सरकार के आदेशानुसार जिलों के सभी उपनिदेशकों की शिमला में बैठक हुई है। बैठक में नई शिक्षा नीति बनाने की कवायद शुरू करने का फैसला लिया गया। नई शिक्षा नीति में सरकारी स्कूलों में घटती छात्रों की संख्या को दूर करने, निजी स्कूलों के समकक्ष खड़े होने की तैयारी है।
पूरी तरह बदला जा सकता है सिलेबस
पाठ्यक्रम में गुणवत्ता और आधुनिकता लाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई नीति बनाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को भी नई शिक्षा नीति से दूर किया जाएगा। इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाना शुरू किया है। तीस साल बाद प्रदेश की शिक्षा नीति को सरकार बदलने जा रही है।
नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के तरीके से लेकर पाठ्यक्रम को पूरी तरह बदलने की योजना है। केंद्र सरकार ने दीर्घकालीन और अल्पकालीन योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें पूरी तरह बदली जा सकती हैं।
शिक्षक बनने को करवाए जाने वाले कोर्स भी हो सकते हैं चेंज
साथ ही शिक्षकों को रूटीन में देने वाले प्रशिक्षण को सभी के लिए अनिवार्य और मजबूत बनाया जाएगा। बच्चों को आकर्षक तरीके से पढ़ाकर कैसे बेहतर रिजल्ट दिए जा सकते हैं, इस पर काम किया जाना है। योजना के तहत शिक्षक बनने को करवाए जाने वाले कोर्सों का खाका बदला जाएगा।
जेबीटी, बीएड से लेकर अन्य कोर्स काफी बेहतर बनाए जाएंगे। सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने, बेहतर रिजल्ट लाने और शिक्षकों की जवाबदेही तय करने जैसे कार्यक्रमों पर विचार होगा। निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल के बच्चे कैसे प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं इसका खाका तैयार करना शुरू किया जा सकता है।
ये हो सकते हैं संभावित बदलाव
सिलेबस में होगा भारी फेरबदल। शिक्षकों के प्रशिक्षण का मॉड्यूल बदलेगा। शिक्षक बनाने को प्रशिक्षण का तरीका बदलेगा। पढ़ाई का तरीका प्रायोगिक बनाना होगा। अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी। कम्युनिकेशन स्किल पर जोर देगा विभाग। ग्रुप डिस्कशन का कल्चर शुरू करने की बनेगी योजना। विषयवार प्रोजेक्ट तैयार करवाने का काम होगा शुरू।
अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने बताया है कि केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति बना रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार से भी राय मांगी गई है। जल्द ही नई नीति बनाने के लिए राय दे दी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने बताया है कि नई शिक्षा नीति बनाने के लिए कमेटी का गठन होगा। कमेटी गठित होने पर राय दी जाएगी। अभी 1986 की नीति पर काम चल रहा है।
स्कूल प्रवक्ता संघ ने किया फैसले का स्वागत
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने सरकार द्वारा 2016 से नई शिक्षा नीति लागू करने का स्वागत किया है। संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डा. अश्वनी कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरी शर्मा, महासचिव सुरेंद्र सकलनी और प्रदेश प्रेस सचिव प्रेम शर्मा ने कहा कि सरकार के इस फैसले से शिक्षा में गुणवत्ता आएगी।
प्रेस सचिव प्रेम शर्मा ने बताया है कि संघ स्वयं भी शिक्षा की गुणवत्ता व सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों कि संख्या में कैसे बढ़ोतरी हो इस विषय पर एक राज्य स्तरीय सम्मेलन का शीघ्र आयोजन करेगा। राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रख्यात शिक्षाविदों को जानकारी प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सम्मेलन में प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से सत्र 2014-2015 में मेरिट में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा।