फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सदन में रखा ये बिल, चर्चा आज

Sat, 15 Dec 2018 12:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तपोवन (धर्मशाला)
विज्ञापन
विज्ञापन

देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी जयराम सरकार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद का गठन करेगी। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सदन में राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद अधिनियम-2018 के गठन का बिल रखा। सत्र के अंतिम दिन शनिवार को बिल पर चर्चा प्रस्तावित है। इसके बाद अगर सदन बिल को मंजूरी देता है तो उसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

विज्ञापन


राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत उच्च शिक्षा में गुणात्मकता लाने को परिषद का गठन किया जा रहा है। प्रदेश में रूसा के क्रियान्वयन को लेकर रणनीति और योजना बनाने, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पाठ्यक्रम को समकालीन बनाने, मूल्यांकन और निगरानी, शैक्षणिक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से मुहैया करवाने, दिशा-निर्देश और सलाह देने, रूसा के तहत फंडिंग कार्य करने, नए संस्थानों और कॉलेजों की स्थापना पर सुझाव देने और संस्थानों की मान्यता की प्रक्रिया को सुधारने का काम परिषद करेगी।

उच्च शिक्षा के अनुसंधान अध्ययन, प्रदेश विवि, तकनीकी विवि से संबंधित कॉलेज इसके दायरे में रहेंगे। नौणी, कृषि विवि और वेटरनेरी कॉलेज परिषद के दायरे से बाहर रहेंगे। परिषद का अध्यक्ष कोई शिक्षाविद होगा। सरकार के सचिव (शिक्षा) उपाध्यक्ष और राज्य परियोजना अधिकारी रूसा सदस्य सचिव होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

सदस्यों में सूबे के दो सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय विवि के कुलपति, दो निजी विवि के कुलपति, सरकार के सचिव (वित्त) या उनका कोई प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, सचिव (तकनीकी शिक्षा) या उनका कोई प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव पद से नीचे का न हो, निदेशक उच्च शिक्षा इसके सदस्य होंगे।

परिषद में गैर सरकारी सदस्य भी होंगे। इसमें कला, विज्ञान, सिविल सोसायटी, प्रौद्योगिकी या कौशल विकास के क्षेत्र से पांच सदस्य, उद्योग से दो विशेषज्ञ, तीन महाविद्यालयों के प्राचार्य, मानव संसाधन मंत्रालय से एक सदस्य और उच्चतर शिक्षा योजना बनाने में अनुभव रखने वाले व्यक्ति को गैर सरकारी सदस्य नियुक्ति किया जाएगा। परिषद का मुख्यालय शिमला में होगा।

पांच साल होगा अध्यक्ष का कार्यकाल
परिषद के अध्यक्ष की नियुक्ति सरकार करेगी। अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष रहेगा। अगर अध्यक्ष का आचरण और कार्य संतोषजनक नहीं रहता है तो सरकार पांच साल से पहले भी अध्यक्ष को हटा सकती है।

छह महीने में एक बैठक करना अनिवार्य
परिषद की छह महीने में कम से कम एक बैठक होना अनिवार्य किया है। बैठक के कोरम के लिए अध्यक्ष व सदस्य सचिव के अलावा दो तिहाई सदस्यों को होना जरूरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें