सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्मार्ट वर्दी देने में हुई देरी को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है। वीरवार को सदन में शिक्षा मंत्री ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया ठीक नहीं होने कारण सरकार ने टेंडर रद्द किए।
इस कारण देरी हुई है। इसको मैं स्वीकार करता हूं। लैपटॉप खरीद में देरी का ठीकरा मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन पर फोड़ा। कहा, कारपोरेशन की देरी के चलते ही अभी तक बायोमीट्रिक मशीनों की भी खरीद नहीं हो पा रही है।
सरकार ने स्कूली बच्चों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों को भी लैपटॉप देने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में तीन साल तक विद्यार्थियों को वर्दी नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में प्रारंभिक स्कूलों में नियमित आधार पर अध्यापकों की भर्ती नहीं की गई थी। दस सालों से प्लेसमेंट के आधार पर स्कूलों में प्रिंसिपलों को लगाया गया। उनकी सरकार बनने के बाद प्रदेश में 31 दिसंबर 2018 तक छह हजार 146 शिक्षकों की भर्ती की गई है।
स्कूलों में पांच हजार 502 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया हमीरपुर चयन बोर्ड पूरी कर रहा है। पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिना बजट प्रावधान के 21 कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया। हमारी सरकार ने इनमें से 16 कॉलेज खोल दिए हैं।