जयराम सरकार फिर 500 करोड़ रुपये का कर्जा लेने जा रही है। यह कर्ज विकास कार्य के नाम पर लिया जाएगा। जबकि इसे कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों की पेंशन देने पर खर्च किया जाएगा।
इससे पहले भी सरकार को एक हजार करोड़ का कर्जा लेना पड़ा है। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को अंतरिम राहत समेत कई अन्य लाभ देने के लिए बजट की कमी पेश आ रही है।
ऐसी स्थिति में जयराम सरकार के पास भी पिछली वीरभद्र और धूमल सरकारों की तरह कर्ज लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। प्रदेश की आमदनी बहुत कम है जबकि खर्चा आमदनी से भी कई गुना ज्यादा है।
ऐसी स्थिति में सरकार को दैनिक कामकाज चलाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। कर्ज लेने के लिए वित्त विभाग ने वीरवार को अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए सरकार अपनी प्रतिभूतियां बेचेगी। हिमाचल सरकार पर पहले से ही करीब 45 करोड़ रुपये का कर्जा चढ़ा हुआ है।