हिमाचल में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लैंड लीज नियम बदलने की तैयारी है। राजस्व विभाग को एक रुपया प्रति वर्ग मीटर की लीज मनी पर आपत्ति है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व तरुण श्रीधर की मानें तो लीज रूल्स में संशोधन के लिए मामले को दोबारा कैबिनेट बैठक में ले जाया जाएगा।
हिमाचल में बीते एक साल से 37 पावर प्रोजेक्टों का आवंटन लटका हुआ है। बिल्ड ऑन ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओओटी) आधार पर 5 से 205 मेगावाट तक के हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों का सरकार ने आवंटन करना है। अगस्त 2014 में ऊर्जा निदेशालय ने प्रोजेक्टों के आवंटन के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं लेकिन किसी भी निवेशक ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
बीते जुलाई में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने प्रोजेक्ट लगाने के लिए अपफ्रंट मनी प्रीमियम को 35 लाख से घटाकर एक लाख रुपये प्रति मेगावाट किया है। प्रोसेसिंग फीस को भी एक लाख से घटाकर 50 हजार रुपये प्रति मेगावाट किया है। बैंक गारंटी को घटाया गया है। लैंड लीज मनी को जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की तर्ज पर प्रति वर्ग मीटर एक रुपये किया है। इतनी कम राशि में प्रोजेक्ट के लिए भूमि देने को राजस्व विभाग तैयार नहीं है।
इतनी क्षमता के हैं हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट
5 से 25 मेगावाट के 29 प्रोजेक्ट
25 से 50 मेगावाट के दो प्रोजेक्ट
50 से 100 मेगावाट के 3 प्रोजेक्ट
100 मेगावाट से अधिक 3 प्रोजेक्ट
इन प्रोजेक्टों का होना है आवंटन- जिला लाहौल स्पीति में पट्टम (65 मेगावाट), रशहिल (130 मेगावाट), थंडी (104 मेगावाट), सीतिनगरी (98 मेगावाट), लोअर महाल ( 8 मेगावाट), अप्पर महाल (9 मेगावाट), जिला चंबा में साल-वन (65 मेगावाट), चोबिया-वन (14 मेगावाट), सुंद्राली (11 मेगावाट), टूंडा-टू (18 मेगावाट), मी (7.5 मेगावाट) , देहडा (8.9 मेगावाट), देहड़ा-वन (9.4 मेगावाट)
जनकार (24.5 मेगावाट), कुटोई (6.2 मेगावाट), गलवट (12.8 मेगावाट), उर-वन (5.8 मेगावाट), लालूनी (19.5 मेगावाट), कालीहेन (19.1 मेगावाट), डूनाली स्टेज वन एंड टू (17 मेगावाट), जिला शिमला में नोगली टॉप (8.4 मेगावाट)
जंगलिख (18 मेगावाट), रुपिन-टू (15 मेगावाट), जिला कांगड़ा में खौली-टू (6 मेगावाट), जिला किन्नौर में बारहखंबा (45 मेगावाट), वनगार (36.5 मेगावाट), डूलिंग (8 मेगावाट), टागला (63.5 मेगावाट), रोपा स्टेज टू एंड थ्री (205 मेगावाट), रोपा टॉप (12 मेगावाट), वनगार (10 मेगावाट)
होजिस (24 मेगावाट), यमथिंग (15 मेगावाट) जिला मंडी में मकोरी (20.8 मेगावाट), भूजलिंग (20 मेगावाट) और जिला कुल्लू में मनालसू (21.9 मेगावाट), सेरी रावला (7 मेगावाट) हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों का आवंटन होना है।