रिटायरियों की बर्खास्तगी के फैसले पर सरकार की खासी फजीहत हुई। सरकार ने एक साथ हजार से ज्यादा पटवारियों को एक्सटेंशन देने के फैसले को निरस्त कर दिया। नतीजा यह हुआ कि वाहवाही के बजाय लोग कामकाज रुकने से त्राहि-त्राहि करने लगे। सरकार को आनन-फानन में अपने फैसले को पलटना पड़ा और नई नियुक्ति होने तक रिटायर्ड पटवारियाें को नियुक्ति देने का एलान करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर मजाक बन गया फैसला
सरकार के फैसलों पर विवाद भी हुआ। सरकार ने गुपचुप तरीके से प्रदेश लोक सेवा आयोग में सदस्य के दो नए पद सृजित कर दिए। यही नहीं, एक पद के सृजन की नोटिफिकेशन के दिन ही नियुक्ति आदेश और शपथ ग्रहण भी करा दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने जयराम सरकार का मजाक तो बनाया, साथ ही कोर्ट तक में इस आदेश को चुनौती देने की बात कही।
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गुड़िया प्रकरण के बाद हुई किरकिरी के बीच पुलिस की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे डीजी सोमेश गोयल को हटाने पर भी सवाल उठे। पुलिस एक्ट के अनुसार डीजीपी को दो साल से पहले नहीं हटाया जा सकता।
लेकिन किन्हीं कारणों से सरकार ने सोमेश गोयल को हटा उनके जूनियर डीजी सीता राम मरडी को डीजीपी बना दिया। इस फैसले को लेकर भी अफसरशाही में खासी चर्चा हुई।
पहले तबादला, फिर संशोधन
जयराम सरकार ने पिछले एक महीने के भीतर सैकड़ों अफसरों के तबादले कर डाले, लेकिन अव्यवस्थित तरीके से किए गए तबादलों में से कई मामलों में सरकार को संशोधन आदेश जारी करने पड़े।