बीते साल नवंबर महीने में इसे डबल बैंच के लिए शिफ्ट किया गया। 5 जनवरी से इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। राज्य के हजारों शिक्षकों का भविष्य इस मामले से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आरोप लगाया था कि चहेतों को नौकरी दी गई जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी। प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही करीब 5500 पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया।
इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसके बाद से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। करीब 2000 पीटीए शिक्षक अनुबंध पर आने से छूट गए हैं। अनुबंध पर नहीं आ सके ये शिक्षक लेफ्ट आउट पीटीए शिक्षक हैं।
पीटीए शिक्षकों को लेकर सरकार के फैसले के बाद पैट, पैरा और एसएमसी शिक्षकों पर भी स्थिति स्पष्ट होगी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब चार हजार प्राथमिक सहायक शिक्षक (पैट), एक हजार पैरा और ढाई हजार एसएमसी शिक्षक नियुक्त हैं। यह सभी शिक्षक अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते प्रदेश सरकार इन्हें नियमित नहीं कर पा रही है।