प्रेस वार्ता करते हिमाचल के प्रधान महालेखाकार राम मोहन जौहरी।
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हिमाचल प्रदेश दरिद्रता के निचले पायदान पर पहुंच गया है। यहां पहले से लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी कर्ज लिया जा रहा है। विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों के बढ़ने के बीच मंगलवार को हिमाचल के प्रधान महालेखाकार ने भी चिंता जताते हुए कहा कि वेतन बढ़ने पर घाटे में चल रही प्रदेश सरकार पर और बोझ बढ़ेगा।
उन्होंने हिमाचल सरकार पर पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने की गलत परंपरा पर भी सवाल उठाए। प्रधान महालेखाकार राम मोहन जौहरी ने कहा कि सरकार लोन के पैसों को विकास के कामों पर लगाने के बजाय उधार और ब्याज चुकाने पर खर्च कर रही है।
इसकी वजह से प्रदेश को आने वाले समय में ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पेश होने के बाद मंगलवार को हिमाचल के प्रधान महालेखाकार ने ऑडिट रिपोर्ट के जरिये सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया। प्रेस वार्ता कर पीएजी राम मोहन जौहरी ने कहा कि हर साल प्रदेश सरकार का घाटा बढ़ रहा है।
राजकोषीय देनदारियां 38,192 करोड़
राजकोषीय देनदारियां वर्ष 2014-15 अंत में पिछले साल की अपेक्षा 13 प्रतिशत बढ़कर 38,192 करोड़ हो गई हैं।
सरकार हर साल मार्केट से लोन तो ले रही है लेकिन उसे विकास योजनाओं या ऐसी जगहों पर नहीं लगा रही जहां उस लोन की राशि से सरकार मुनाफा कमा सके। सरकार इस पैसे को उधारी और उसके ब्याज को चुकाने में इस्तेमाल कर रही है। यह कदम एचपीएफआरबीएम एक्ट के नियमों के विरुद्ध है और प्रदेश को इससे आने वाले समय में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
राजकोषीय देनदारियां वर्ष 2014-15 अंत में पिछले साल की अपेक्षा 13 प्रतिशत बढ़कर 38,192 करोड़ हो गई। यह राशि राज्य के राजस्व प्राप्तियों का 214 प्रतिशत है। कुल सरकारी देनदारी में मार्केट लोन का हिस्सा भी साल 2010-11 के 49.45 प्रतिशत से बढ़कर साल 2014-15 में 59.06 प्रतिशत हो गया।
हर साल वेतन एवं मजदूरी पर खर्च के बढ़ते बोझ पर भी चिंता जताई गई। कहा गया कि सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। राम मोहन जौहरी ने कहा कि वैसे तो सीएजी ऑडिट कर अपनी रिपोर्ट विधानसभा कमेटी को सौंपती है, लेकिन अगर अनियमितताओं में किसी तरह के घोटाले के कागजी तथ्य मिले तो सरकार से विजिलेंस जांच की सिफारिश जरूर करेंगे।