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हिमाचल में बिना बारिश बिगड़ा गेहूं और चने के दानों का आकार, सरकार ने तलब की नुकसान की रिपोर्ट

Thu, 01 Apr 2021 10:50 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला

सार

  • सूखे से कृषि फसलों को हुए नुकसान की कृषि अधिकारियों से रिपोर्ट तलब
  •  खेतों में नमी न होने से खड़ी फसलों की गुणवत्ता होने लगी प्रभावित 
  • बागवानी क्षेत्र में नए पौधे लगाने का काम 30 फीसदी कम रहा
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हिमाचल में सूखे की मार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसे हालात ने किसानों के खेतों में खड़ी फसल खासकर गेहूं और चने के दानों का आकार बिगाड़ दिया है। दोनों फसलों के दानों का आकार विकसित नहीं हो पाया। राज्य सरकार ने प्रदेश में सूखे से कृषि फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारियों से तलब कर ली है। खेतों में नमी न होने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होने लगी है।  राज्य के कृषि निदेशक डॉ. नरेश कुमार बधान ने बताया कि राज्य में सूखे के कारण गेहूं और चने की फसलें प्रभावित होने लगी हैं।

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दानों का आकार नहीं बढ़ रहा। उनका कहना है कि सरकार ने जिलों कृषि अधिकारियों से नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।  राज्य के बागवानी निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि उचित मात्रा में बारिश और बर्फबारी न होने से बगीचों में फलदार पौधे लगाने का काम 30 फीसदी घट गया है। फूलों के बाद फलों की सेटिंग में कोई दिक्कत नहीं आई है। अभी तक बागवानी को नुकसान हुआ हो, ऐसी किसी क्षेत्र से कोई शिकायत नहीं आई है। 

11 फीसदी पेयजल और सिंचाई योजनाएं प्रभावित
प्रदेश में पेयजल योजनाएं भी सूखने लगी हैं। अगर आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं हुई तो पीने के पानी का संकट और बढ़ेगा। प्रदेश के जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता नवीन पुरी कहते हैं कि सूखे से 11 फीसदी पेयजल और सिंचाई योजनाएं प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में राज्य में 9400 पेयजल और 2400 सिंचाई योजनाएं काम कर रही हैं।
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मटर की पैदावार पर मौसम की मार 
 जिला कुल्लू की मंडियों में मटर की खेप पहुंचनी शुरू हो गई है। निचले इलाकों में शुरुआती सीजन में किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। हालांकि, सर्दियों में पर्याप्त बारिश न होने से गत वर्ष की अपेक्षा इस बार फसल आधी है। जिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती हो रही है। उधर, मंडी जिला में गेहूं का दाना नहीं बढ़ा। इससे किसानों की मेहनत बेकार चली गई।

मंडी जिले में 62 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बीजाई होती है। इस वर्ष 20 हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। नाचन और सराजघाटी में सूखे से करोड़ों का मटर तबाह हो गया है। हिमाचल समेत पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और हरियाणा के आढ़तियों के गोदाम मटर से खाली पड़े हैं। नालागढ़ में सूखे की मार से इस साल गेहूं की पैदावार में 30 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है।

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कब कितने बरसे बादल

मानसून सीजन 2020 : एक जून से तीस सितंबर तक सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश
पोस्ट मानसून सीजन 2020 : एक अक्तूबर से 31 दिसंबर तक सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश
विंटर सीजन 2021 : एक जनवरी से 28 फरवरी तक सामान्य से 69 फीसदी कम बरसे बादल
प्री मानसून सीजन 2021 : एक मार्च से 31 मार्च तक सामान्य से 62 फीसदी कम बारिश हुई दर्ज

3 अप्रैल तक मौसम साफ, 4 से 6 तक बारिश के आसार
 मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 3 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से 4 से 6 अप्रैल तक बारिश और बर्फबारी होने के आसार जताए हैं। मध्य और उच्च पर्वतीय जिलों में 4 अप्रैल से मौसम बदलने की संभावना है। 5 और 6 अप्रैल को पूरे प्रदेश में मौसम खराब रहने के आसार हैं।
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