आयोग ने इस बात पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि यहां जनजातीय लोगों पर होने वाले अत्याचार के मामले और इन क्षेत्रों में शिक्षा अधूरी छोड़ने वालों की संख्या लगभग शून्य है। उन्होंने कहा कि यह भी हर्ष की बात है कि पूरे प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार चंद शर्मा ने जनजातीय विकास विभाग की गतिविधियों से संबंधित तथा जनजातीय क्षेत्रों के विभिन्न स्तरों पर विकास के लिए बनाई गई नीतियों तथा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
आयोग के सदस्य हरी कृष्ण डामोर, हर्षद भाई चुन्नीलाल वासवा, संयुक्त सचिव सीसी कुमार राठो, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग मनोज कुमार, प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत, सचिव खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले अमिताभ अवस्थी, सचिव ग्रामीण विकास राकेश कंवर सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने आयोग को अवगत करवाया कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के लोग समृद्ध हैं। इन क्षेत्रों में हर वर्ग का समान विकास हो रहा है। किन्नौर जिला का सेब तथा चिलगोजा, लाहौल का आलू तथा मटर पूरे देश में निर्यात किया जा रहा है।
जनजातीय क्षेत्रों की अलग सीट बनाने का प्रस्ताव नहीं
आयोग के अध्यक्ष डॉ. नंद कुमार साय ने समीक्षा बैठक के बाद प्रेस वार्ता में बताया कि हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों के लिए अलग लोकसभा सीट बनाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।
जनजातीय क्षेत्रों के लिए रियायती दरों पर फ्लाइट्स शुरू करने को लेकर कोई मांग नहीं आई है। अगर मांग आएगी तो उस पर विचार किया जाएगा। डोडरा क्वार को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव अभी आयोग के पास नहीं आया है। यह मामला केंद्र सरकार के विचाराधीन है।