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प्रचंड गर्मी में पेड़ की छांव में पढ़ रहे बच्चे, सरकार ने स्कूल अपग्रेड करने के बाद नहीं ली सुध

Mon, 03 Jun 2019 12:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर राजपाल शर्मा, अमर उजाला, सतौन (सिरमौर)
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- फोटो : अमर उजाला
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घासफूस की झोंपड़ी में चल रहे प्राइमरी स्कूल जंबूखाला को अपना भवन मिल गया है। नया भवन बनने के बाद प्राइमरी स्कूल के बच्चों की परेशानियां दूर हो गई हैं, लेकिन स्कूल को अपग्रेड करने के बाद यहां बने मिडल स्कूल के 24 बच्चे प्रचंड गर्मी में पेड़ की छांव में पढ़ाई करने को विवश हैं। गर्मी में उनका सहारा एक पेड़ है तो बरसात में प्राइमरी स्कूल के बरामदे में पढ़ाई हो रही है। स्कूल को अपग्रेड करने के दो साल बाद भी भवन नहीं बन पाया है। खुले आसमान के नीचे पढ़ाई कर रहे बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका से अभिभावक चिंतित हैं। 

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जंबूखाला स्कूल वर्षों तक घासफूस की बनी झोंपड़ी में चलता रहा। अमर उजाला ने जब इस मुद्दे को उठाया तो शिक्षा विभाग ने नया भवन बना दिया। अब मिडल स्कूल के बच्चों को भी बैठने के लिए कोई जगह नहीं है। स्कूल अपग्रेड होने के बाद चार डंडे खड़े कर उस पर तिरपाल लगाकर कक्षाएं चलाई गई। अंधड़ के बाद तिरपाल फट गया। अब विद्यार्थी खुले आसमान तले पढ़ाई कर रहे हैं। प्रचंड धूप में भी विद्यार्थी खुले में पढ़ाई करने को विवश हैं। एनएच 707 लाल ढांग रोहड़ू राष्ट्रीय मार्ग पर अजौली से तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित जंबूखाला में गुज्जर समुदाय के करीब 40 परिवार रहते हैं।

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गुज्जर समुदाय के लगभग 84 छात्र यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्राथमिक पाठशाला में 61 छात्र और छठी से आठवीं तक 24 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 2015 में सरकार ने मिडल स्कूल की घोषणा तो कर दी, लेकिन भवन की कोई व्यवस्था नहीं की। एक हाल और किचन के लिए चार लाख से ज्यादा का बजट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन वह विभाग की जमीन होने के कारण पेच फंसा है। अभी तक जमीन स्कूल के नाम नहीं हो पाई है। स्कूल के प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि मिडल स्कूल के पास अपना कोई भवन नहीं है।

धूप में जगह-जगह पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करवाई जाती है। बरसात में प्राथमिक पाठशाला के भवन में बच्चों को रखा जाता है। डीएफओ पांवटा साहिब कुनाल अंगरिश ने बताया कि स्थानीय ग्रामीण समस्या को लेकर कई बार उनके मिले हैं। वन अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल को जमीन ट्रांसफर करने की उन्हें शक्ति दी गई है। इसके लिए पंचायत की ग्रामसभा का प्रस्ताव होना चाहिए, लेकिन पंचायत में ग्रामसभा का कोरम ही पूरा नहीं हो रहा।
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