युवा जनसंख्या के मामले में हिमाचल प्रदेश की स्थिति अन्य राज्यों से बेहतर है। 1971 की जनगणना के अनुसार युवाओं की कुल जनसंख्या 10.56 लाख से बढ़कर 2011 में 24.20 लाख हो गई है। 40 साल की इस अवधि में युवाओं की आबादी में 129 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि इसी अवधि में सामान्य जनसंख्या में 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, भारत में 1991 से 15-34 आयु वर्ग के युवाओं का लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है जबकि हिमाचल प्रदेश में स्थिति थोड़ी अलग है। भारत में 1971 में लिंगानुपात 961 था जो 1911 में घटकर 39 रह गया है। इसी आयु वर्ग में हिमाचल प्रदेश में 1971 में लिंगानुपात 961 था जो 1911 में बढ़कर 972 हो गया है।
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम हो रही है और शहरी इलाकों में कुल प्रजनन दर प्रत्येक महिला से दो बच्चों के अनुपात से भी कम है। कुल प्रजनन दर 2005 के 2.2 के स्तर से गिर कर 2015 में यह केवल 1.7 रह गई है जो कि जनसंख्या स्थिरता के 2.1 अनुपात स्तर से 0.4 अंक नीचे है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में 15 से 34 वर्ष आयु वर्ग में साक्षरता दर 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है जबकि 1971 में यह मात्र 46.8 प्रतिशत थी। स्नातक स्तर पर छात्रों का नामांकन 79.32 प्रतिशत सबसे अधिक है।
वर्ष 2011-12 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 54 प्रतिशत पुरुष और 47 प्रतिशत महिलाएं श्रम शक्ति में शामिल थीं। 1911-12 के दौरान पुरुषों और महिलाओं दोनों की बेरोजगारी दर 1.8 प्रतिशत थी जबकि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की 11 प्रतिशत व पुरुषों की 2.1 प्रतिशत बेरोजगारी दर थी।