सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता के खंड को पूरे प्रदेश में लागू करते हुए चुनाव प्रक्रिया समाप्त नहीं होने तक पंचायतों और नगर पालिकाओं की संरचना, वर्गीकरण या क्षेत्र में परिवर्तन पर रोक लगा दी है। इसी बीच हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर करवाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार व राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। दोनों से पूछा है कि कितने समय के अंदर पंचायतीराज संस्थानों के चुनाव करवाए जाएंगे।
मंगलवार को मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पंचायतीराज सचिव का जिम्मा सी पालरासु को सौंप दिया है। राजेश शर्मा को हटाने के आदेशों से राजनीति भी गरमा गई है। जानकारी अनुसार राजेश शर्मा 8 से 27 दिसंबर तक अवकाश पर जा रहे हैं।
पंचायत चुनाव और चुनाव आयोग की अधिसूचना पर सीएम सुक्खू ने ये कहा
वहीं कांगड़ा में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन एक्ट लगा है। हमारा सबसे पहले दायित्व आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाना है। पंचायतों में जब सड़कें नहीं खुलेंगी तो आप वोटर का अधिकार कैसे छीन सकते हैं। सड़कें खोलना प्राथमिकता है और इस दिशा में काम हो रहा है। पंचायत के चुनाव होंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है। सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने जो अधिसूचना जारी की है, उसका कानूनी अध्ययन किया जा रहा है। जो भी कानून के दायरे के तहत होगा उसमें आगामी कार्रवाई होगी। मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि कुछ पंचायतों का पुनर्सीमांकन होना है और कुछ का पुनर्गठन कर नई पंचायतें बननी हैं।