हिमाचल सरकार ने अवैध भवन मालिकों को एक और सौगात दी है। इन्हें भवन नियमित कराने के लिए अब निजी इंजीनियरों को 30 से 35 हजार रुपये देने की जरूरत नहीं। यह प्रमाण पत्र बिजली बोर्ड, आईपीएच, लोक निर्माण विभाग और अन्य सरकारी कार्यालयों में तैनात सिविल इंजीनियर मुफ्त में बनाकर देंगे। केंद्रीय कार्यालयों में तैनात इंजीनियरों को भी यह शक्तियां दी गई हैं। निजी इंजीनियरों की मनमानी के चलते प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है।
सोमवार को टीसीपी मुख्य कार्यालय में आयोजित बैठक में अफसरों ने इस पर स्थिति साफ कर दी है। बैठक की अध्यक्षता राज्य टाउन एंड कंट्री प्लानर हेडक्वार्टर सतीश शर्मा ने की। बता दें कि प्रदेश सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि अवैध भवनों को नियमित कराने के लिए निजी सिविल इंजीनियर स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र के कई हजार रुपये की मांग कर रहे हैं जबकि नक्शा तैयार करने की कुल फीस 10 से 12 हजार रुपये तक रहती है।
सतीश शर्मा ने बताया कि इस प्रमाण पत्र को देने के लिए इंजीनियर को सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री, स्ट्रक्चर डिजाइन में छह साल का अनुभव, एमटेक (सिविल इंजीनियरिंग) में चार साल और पीएचडी (सिविल इंजीनियरिंग) में एक साल का स्ट्रक्चर डिजाइन या सुपरवाइजर का अनुभव होना जरूरी है।
पहले सरकार ने केवल निजी स्ट्रक्चर इंजीनियर को पंजीकृत कर उन्हें प्रमाण पत्र देने के लिए अधिकृत किया था। टीसीपी कार्यालय में मात्र 30 इंजीनियरों ने अपना पंजीकरण कराया है। अब इनके साथ सरकारी इंजीनियर भी प्रमाणपत्र देने के लिए अधिकृत हैं। मीटिंग में शिमला, सिरमौर, बिलासपुर, मंडी, सोलन, कांगड़ा समेत अन्य जिलों के टाउन प्लानर और सहायक टाउन प्लानरों ने भाग लिया।
30 मार्च तक लिए जाएंगे आवेदन
प्रदेश में 30 मार्च तक अवैध भवनों को नियमित करने के लिए आवेदन लिए जाएंगे। इन भवन मालिकों को सरकार ने आवेदन करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। एक साल के भीतर ही टाउन प्लानर और जेई को मौके का दौरा कर अवैध भवन का नक्शा पास करना होगा।