इसके अलावा सरकार दोनों कॉलेजों में डीएनवी कोर्स की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की मानें तो डीएनवी के लिए दो साल का कोर्स होता है जबकि पीजी 3 साल में की जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि मरीजों को उपचार के लिए बाहरी राज्यों के अस्पतालों की शरण नहीं लेनी पड़ेगी। हिमाचल में ही गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों मेडिकल कॉलेजों में कितने लोगों का उपचार किया गया और कितने ऑपरेशन किए गए, कौन मरीज गंभीर बीमारी से पीड़ित है, मोबाइल पर प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट ली जा रही है।