मंदिरों को इन निर्देशों का पालन करना होगा
सभी मंदिर प्रबंधन समितियों, कार्यकारी अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा।
चढ़ावे (दान पात्र/दान पेटियां) की सुरक्षा
- सभी दान पेटियां ऐसी होनी चाहिए जिनसे छेड़छाड़ न की जा सके और उन्हें मजबूती से लगाया जाना चाहिए।
- हर दान पेटी का एक अलग पहचान नंबर होना चाहिए।
- चाबियों तक पहुंचने के लिए डुअल लॉक या मल्टी की सिस्टम होना चाहिए और उनकी कस्टडी का सही रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए।
- दान पेटियों को बदलने या उनकी मरम्मत करने का काम ठीक से डॉक्यूमेंट किया जाना चाहिए।
चढ़ावे को खोलने और गिनने के नियम
- दान पात्र केवल सक्षम अधिकारी द्वारा मंजूर की गई तारीखों पर, विधिवत अधिसूचित समिति द्वारा ही खोले जाएंगे।
- जिला मजिस्ट्रेटों को इस काम के लिए उपयुक्त समिति अधिसूचित करने का अधिकार है, जैसा वे उचित समझें।
- खोलने और गिनने का काम एक समिति की मौजूदगी में किया जाएगा।
- इसमें कार्यकारी अधिकारी/मंदिर अधिकारी, जिला प्रशासन का प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी/लेखाकार, मंदिर प्रबंधन समिति का प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाह शामिल होंगे।
- पूरी गिनती प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी की जाएगी।
- गिनती वाला कमरा सीसीटीवी निगरानी में रहेगा।
- गिनती वाला कमरा और वहां तक पहुंच सुरक्षित होनी चाहिए।
कैश जमा करन के लिए नियम
- गिनती के बाद एक वर्किंग डे के अंदर तय बैंक अकाउंट में कैश जमा किया जाएगा।
- मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में कैश नहीं रखा जाएगा, सिवाय खास हालात में और लिखित मंजरी के।
- बहुत ज्यादा बैंक अकाउंट रखने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि एक ही बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया जाए।
- बैंकों के साथ सबसे अच्छी ब्याज दरों के लिए बातचीत की जानी चाहिए।
- अकाउंटिंग और रिकॉर्ड रखना
- कैश, गहने, सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजो की हर प्राप्ति को रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड में ठीक से दर्ज किया जाएगा।
इनके लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे
- कैश के रूप में चढ़ावा
- सोने और चांदी के गहने
- कीमती सामान
- विदेशी मुद्रा
- सामान के रूप में दान।
- जहां भी मुमकिन हो, डिजिटल अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा।
कीमती सामान की इन्वेंट्री
- गहनों और कीमती सामान की पूरी इन्वेंट्री तैयार की जाएगी और समय-समय पर अपडेट की जाएगी।
- हर तिमाही में भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
- सालाना सत्यापन सरकार की ओर से नामित समिति द्वारा किया जाएगा।
कर्मचारियों का रोटेशन, पुलिस सत्यापन होगा
- कैश और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर रोटेशन किया जाएगा।
- कोई भी व्यक्ति तय अवधि से अधिक समय तक लगातार दान की गिनती का काम नहीं करेगा।
- कैश और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन सुनिश्चित किया जाएगा।
- यदि अनुबंध पर एजेंसियां लगी हैं, तो उन्हें भी सत्यापन की शर्तों का पालन करना होगा।
पारदर्शिता रखनी होगी, अनियमितताओं को रिपोर्ट करना होगा
सालाना ऑडिट किए गए खाते मंदिर प्रबंधन समिति के सामने रखे जाएंगे।
दान के इस्तेमाल के बारे में जानकारी मंदिर के नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट (जहां उपलब्ध हो) पर दिखाई जा सकती है
किसी भी तरह की चोरी, धोखाधड़ी के शक, छेड़छाड़, कमी या अनियमितता की सूचना तुरंत इन अधिकारियों को दी जाएगी।
- स्थानीय पुलिस, डिप्टी कमिश्नर।
- सबसे पास के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट।
- सेक्रेटरी और डायरेक्टर, भाषा, कला और संस्कृति/सक्षम अधिकारी और सरकार।
- जानकारी छिपाने या देर से रिपोर्ट करने के लिए ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।
मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी
इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मंदिर प्रबंधन समितियां व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगी। निर्देशों का पालन न करने, लापरवाही या कर्तव्य में कोताही बरतने पर लागू नियमों और कानूनों के तहत अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अनुपालन रिपोर्ट
सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन वाले सभी मंदिरों को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें ये बातें बताई जाएंगी:
- सुरक्षा के मौजूदा इंतजाम
- सीसीटीवी कवरेज
- ऑडिट की स्थिति
- इन्वेंट्री की स्थिति
- बैंकिंग इंतजाम
- पाई गई कमियां और इन निर्देशों के पालन के लिए की गई योजनाबद्ध कार्रवाई।
- इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए डायरेक्टर, भाषा और संस्कृति राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी होंगे।
श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखें
निर्देशों में कहा गया है कि हिमाचल को देवभूमि के नाम से जाना जाता है और यहां लगभग हर गांव का अपना एक मुख्य देवता होता है। राज्य में माता चिंतपूर्णी, माता नयना देवी, बाबा बालक नाथ, माता ज्वाला और माता ब्रजेश्वरी जैसे शक्तिपीठ स्थित हैं। किन्नौर कैलाश, मणिमहेश, श्रीखंड महादेव, लामा डल, सरयोलसर और ऐसी ही कई अन्य पवित्र जगहों और झीलों पर हर साल तीर्थयात्रा होती है, जहां राज्य के अंदर और बाहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धा के कारण, लोग सम्मान के तौर पर देवी-देवताओं को नकद और अन्य चीजें दान करते हैं। यह कहने की जरूरत नहीं है कि मंदिर ट्रस्ट, मंदिर कमेटियांया मंदिर प्रबंधन (चाहे उन्हें किसी भी नाम से बुलाया जाए) का यह फर्ज है कि वे श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखें।