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Himachal: चढ़ावा चोरी मामले के बाद हिमाचल सरकार सख्त, मंदिरों में सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए निर्देश जारी

Sat, 11 Jul 2026 03:22 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

राज्य सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन वाले मंदिरों तथा अन्य मंदिरों में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।  सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति राकेश कंवर की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। 
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हिमाचल के मंदिरों के लिए निर्देश जारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन वाले मंदिरों तथा अन्य मंदिरों में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।  सचिव भाषा, कला एवं संस्कृति राकेश कंवर की ओर से जारी किए गए निर्देशों में कहा है कि देश के एक प्रमुख मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान की कथित चोरी और हेराफेरी मामले से बेहतर इंटरनल कंट्रोल और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत सामने आई है। इसे देखते हुए हिमाचल में राज्य सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन वाले सभी मंदिरों को चढ़ावे, नकदी, गहनों और अन्य कीमती सामानों की सुरक्षा के लिए अपनी व्यवस्थाओं की तुरंत समीक्षा करने और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।। सरकार ने कहा है कि जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि अन्य सभी मंदिर भी इसी तरह के कंट्रोल लागू करें, भले ही वे मंदिर जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्टों के सीधे कंट्रोल में न हों (जिनका प्रबंधन राज्य अधिनियम या राज्य सरकार की अधिसूचित कमेटियों के तहत किया जाता है)। जिन मंदिरों का प्रबंधन जिला प्रशासन के कंट्रोल में नहीं है, उनकी प्रबंधन कमेटियों को भी भक्तों का भरोसा जीतने के लिए उचित सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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मंदिरों को इन निर्देशों का पालन करना होगा
सभी मंदिर प्रबंधन समितियों, कार्यकारी अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा।
 
 चढ़ावे (दान पात्र/दान पेटियां) की सुरक्षा
  •  सभी दान पेटियां ऐसी होनी चाहिए जिनसे छेड़छाड़ न की जा सके और उन्हें मजबूती से लगाया जाना चाहिए।
  •  हर दान पेटी का एक अलग पहचान नंबर होना चाहिए।
  •  चाबियों तक पहुंचने के लिए डुअल लॉक या मल्टी की सिस्टम होना चाहिए और उनकी कस्टडी का सही रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए।
  • दान पेटियों को बदलने या उनकी मरम्मत करने का काम ठीक से डॉक्यूमेंट किया जाना चाहिए।
 

चढ़ावे को खोलने और गिनने के नियम
  •  दान पात्र केवल सक्षम अधिकारी द्वारा मंजूर की गई तारीखों पर, विधिवत अधिसूचित समिति द्वारा ही खोले जाएंगे।
  •  जिला मजिस्ट्रेटों को इस काम के लिए उपयुक्त समिति अधिसूचित करने का अधिकार है, जैसा वे उचित समझें।
  • खोलने और गिनने का काम एक समिति की मौजूदगी में किया जाएगा।
  • इसमें कार्यकारी अधिकारी/मंदिर अधिकारी, जिला प्रशासन का प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी/लेखाकार, मंदिर प्रबंधन समिति का प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाह शामिल होंगे।
  •  पूरी गिनती प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी की जाएगी।
  •  गिनती वाला कमरा सीसीटीवी निगरानी में रहेगा।
  •  गिनती वाला कमरा और वहां तक पहुंच सुरक्षित होनी चाहिए।

सीसीटीवी निगरानी जरूरी
  • आवाज रिकॉर्ड करने और नाइट विजन की सुविधा वाले हाई-रिजाॅल्यूशन सीसीटीवी लगाए जाएंगे जो सभी जरूरी और संबंधित जगहों को कवर करेंगे। कॉरिडोर, एंट्री और एग्जिट भी कवर किए जाने चाहिए, गर्भगृह के आसपास का इलाका, दानपात्र, गिनती वाले कमरे, खजाना/स्ट्रांग रूम, गहने रखने की जगह।
  • सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा।
  • सुरक्षित डिजिटल स्पेस किराये पर लेकर परमानेंट क्लाउड स्टोरेज की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।
  • कैमरों के बिना रुकावट काम करते रहने को पक्का करने के लिए नियमित रूप से जांच की जाएगी।

कैश जमा करन के लिए नियम
  • गिनती के बाद एक वर्किंग डे के अंदर तय बैंक अकाउंट में कैश जमा किया जाएगा।
  • मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में कैश नहीं रखा जाएगा, सिवाय खास हालात में और लिखित मंजरी के।
  • बहुत ज्यादा बैंक अकाउंट रखने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि एक ही बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया जाए।
  • बैंकों के साथ सबसे अच्छी ब्याज दरों के लिए बातचीत की जानी चाहिए।
  •  अकाउंटिंग और रिकॉर्ड रखना
  • कैश, गहने, सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजो की हर प्राप्ति को रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड में ठीक से दर्ज किया जाएगा।

इनके लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे
  1. कैश के रूप में चढ़ावा
  2. सोने और चांदी के गहने
  3.  कीमती सामान
  4.  विदेशी मुद्रा
  5.  सामान के रूप में दान।
  6. जहां भी मुमकिन हो, डिजिटल अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा।

कीमती सामान की इन्वेंट्री
  • गहनों और कीमती सामान की पूरी इन्वेंट्री तैयार की जाएगी और समय-समय पर अपडेट की जाएगी।
  • हर तिमाही में भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
  • सालाना सत्यापन सरकार की ओर से नामित समिति द्वारा किया जाएगा।

ऑडिट और एक्सेस कंट्रोल
  • मंदिर अधिकारी द्वारा मासिक आंतरिक सत्यापन किया जाएगा।
  • सालाना वैधानिक ऑडिट तय समय के भीतर पूरा किया जाएगा।
  •  विभाग या जिला प्रशासन द्वारा अचानक निरीक्षण और ऑडिट किए जा सकते हैं।
  • केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही गिनती वाले कमरों और स्ट्रांग रूम में जाने की अनुमति होगी।
  • जहां भी सुविधा हो, विज़िटर रजिस्टर और बायोमेट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से एंट्री रिकॉर्ड की जाएगी।
  •  कैश संभालने वाले कर्मचारी गिनती वाले कमरे के अंदर बैग, मोबाइल फोन या निजी सामान नहीं ले जा सकेंगे।
     

कर्मचारियों का रोटेशन,  पुलिस सत्यापन होगा
  •  कैश और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर रोटेशन किया जाएगा।
  • कोई भी व्यक्ति तय अवधि से अधिक समय तक लगातार दान की गिनती का काम नहीं करेगा।
  • कैश और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • यदि अनुबंध पर एजेंसियां लगी हैं, तो उन्हें भी सत्यापन की शर्तों का पालन करना होगा।

स्ट्रांग रूम की सुरक्षा
  • स्ट्रांग रूम में डबल लॉक की व्यवस्था होगी।
  •  अंदर जाने के लिए कम से कम दो अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी ज़रूरी होगी।
  • पर्याप्त अलार्म सिस्टम और आग से सुरक्षा के उपकरण लगाए जाएंगे।

डिजिटल दान
  • भक्तों को यूपीआई, क्यूआर कोड, पीओएस मशीनों और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • सभी डिजिटल ट्रांज़ैक्शन सीधे मंदिर के आधिकारिक बैंक खाते में जमा किए जाएंगे।

 पारदर्शिता रखनी होगी, अनियमितताओं को रिपोर्ट करना होगा
 सालाना ऑडिट किए गए खाते मंदिर प्रबंधन समिति के सामने रखे जाएंगे।
दान के इस्तेमाल के बारे में जानकारी मंदिर के नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट (जहां उपलब्ध हो) पर दिखाई जा सकती है


 किसी भी तरह की चोरी, धोखाधड़ी के शक, छेड़छाड़, कमी या अनियमितता की सूचना तुरंत इन अधिकारियों को दी जाएगी। 
  1. स्थानीय पुलिस, डिप्टी कमिश्नर।
  2. सबसे पास के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट।
  3. सेक्रेटरी और डायरेक्टर, भाषा, कला और संस्कृति/सक्षम अधिकारी और सरकार।
  4. जानकारी छिपाने या देर से रिपोर्ट करने के लिए ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।

 मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी
 इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मंदिर प्रबंधन समितियां व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगी। निर्देशों का पालन न करने, लापरवाही या कर्तव्य में कोताही बरतने पर लागू नियमों और कानूनों के तहत अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अनुपालन रिपोर्ट
 सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन वाले सभी मंदिरों को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें ये बातें बताई जाएंगी:
  • सुरक्षा के मौजूदा इंतजाम
  • सीसीटीवी कवरेज
  • ऑडिट की स्थिति
  •  इन्वेंट्री की स्थिति
  •  बैंकिंग इंतजाम
  • पाई गई कमियां और इन निर्देशों के पालन के लिए की गई योजनाबद्ध कार्रवाई।
  •  इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए डायरेक्टर, भाषा और संस्कृति राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी होंगे।
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श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखें
निर्देशों में कहा गया है कि हिमाचल को देवभूमि के नाम से जाना जाता है और यहां लगभग हर गांव का अपना एक मुख्य देवता होता है। राज्य में माता चिंतपूर्णी, माता नयना देवी, बाबा बालक नाथ, माता ज्वाला और माता ब्रजेश्वरी जैसे शक्तिपीठ स्थित हैं। किन्नौर कैलाश, मणिमहेश, श्रीखंड महादेव, लामा डल, सरयोलसर और ऐसी ही कई अन्य पवित्र जगहों और झीलों पर हर साल तीर्थयात्रा होती है, जहां राज्य के अंदर और बाहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धा के कारण, लोग सम्मान के तौर पर देवी-देवताओं को नकद और अन्य चीजें दान करते हैं। यह कहने की जरूरत नहीं है कि मंदिर ट्रस्ट, मंदिर कमेटियांया मंदिर प्रबंधन (चाहे उन्हें किसी भी नाम से बुलाया जाए) का यह फर्ज है कि वे श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखें।
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