निगम और बोर्ड में तैनात अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की कुर्सियां छिन सकती हैं। प्रदेश सरकार जल्द बड़ा फेरबदल कर सकती है। एक-एक निगम और बोर्ड के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों को बुलाकर उनकी समीक्षा की जा रही है, जिससे सरकार की कार्यशैली को और चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सके। इन्हें कांग्रेस में कार्य करने को भी सरकार की ओर से रवाना किया जा सकता है।
प्रदेश में 40 निगम और बोर्ड हैं। इनमें इतने ही अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की तैनाती की गई है। निगम और बोर्ड के अध्यक्षों का पिछले डेढ़ साल का कार्यकाल कैसा रहा। उनकी ओर से कौन से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन निगमों और बोर्डों में उनका किस तरह का योगदान रहा। इन सब बातों को ध्यान में रखकर समीक्षा हो रही है।