प्रिंसिपलों की पदोन्नति का मामला कोर्ट में लंबित था। राज्य के स्कूलों में तैनात प्रिंसिपलों को पदोन्नति मिलने के बावजूद भी एडहॉक पर ही सेवानिवृत्त होना पड़ रहा था। वरिष्ठता के आधार पर शिक्षा विभाग इन्हें प्रिंसिपल तो बनाता रहा, लेकिन किसी भी तरह का वित्तीय लाभ नहीं दिया।
बीते साल अक्तूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता के एक मामले पर हिमाचल उच्च न्यायालय के उस फैसले को यथावत रखा, जिसमें पूर्व सैनिकों की दोबारा नियुक्ति पर सेना की सेवा को वरिष्ठता में नहीं जोड़ने की बात कही थी।
इस फैसले के आने के बाद से शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपलों को स्थायी पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की थी। विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगने से मामला लटक गया था। अब भाजपा सरकार ने दोबारा से इस मामले पर मंथन शुरू कर दिया है।