दूसरे, कई जगह परिवहन निगम की बसों के आगे निजी ऑपरेटरों को रूट दिए गए हैं। इन रूटों में 10 से 15 मिनट का अंतराल है। इससे भी निगम को घाटा हो रहा है। इसी तरह निजी ऑपरेटरों की बात करे तो प्रदेश में इनकी 3500 बसें चल रही हैं। करीब 3 हजार रूटों पर यह ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
परिवहन निगम के मुताबिक एचआरटीसी की तरह निजी ऑपरटरों को भी घाटे के रूट और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों से होकर गुजरना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि परिवहन निगम की तरह निजी ऑपरेटर भी सर्विस प्रोवाइडर हैं।
प्रदेश में बस रूटों को लेकर पॉलिसी बनाई जाएगी। वर्तमान में बसें समयसारिणी के मुताबिक नहीं चल रही हैं। सवारियों को लेकर होड़ मची है। निजी ऑपरेटरों के साथ इसका सेटअप बिठाया जाएगा। निगम के बस रूटों में फेरबदल होने की भी संभावना है। - गोबिंद ठाकुर, परिवहन मंत्री