प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में तैनात 2200 से अधिक प्रवक्ता कॉलेज कैडर में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की योग्यता रखते हैं। ये शिक्षक नेट/सेट, एमफिल और पीएचडी होल्डर होने के बावजूद कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं बन पा रहे हैं।
प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष नरोत्तम ठाकुर और महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि संघ ने स्कूल प्रवक्ताओं को कॉलेज कैडर में कोटा दिलवाने के लिए अथक प्रयास किए, मगर यूजीसी ने इस मांग को खारिज कर दिया।
कहा कि सरकार कॉलेज कैडर में भर्ती अनुबंध आधार पर कर रही है। ऐसे में कोई भी स्कूल प्रवक्ता नियमित नौकरी छोड़ कर कॉलेज कैडर में नहीं जाना चाहेगा। ऐसे में योग्यता के बावजूद प्रवक्ता कॉलेज कैडर में नहीं जा पा रहे हैं।
संघ ने सरकार से मांग की कि अगर कोई प्रवक्ता कमीशन पास कर कॉलेज कैडर को चयनित होता है तो वह जो वेतन स्कूल कैडर में ले रहा है, उसे संरक्षित किया जाए।
सवाल उठाया कि एक जेबीटी पदोन्नत होकर टीजीटी बन सकता है। एक टीजीटी भी पदोन्नत होकर प्रवक्ता बन सकता है, मगर एक प्रवक्ता पदोन्नत होकर कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर क्यों नहीं बन सकता।
कॉलेज में पीएचडी वाले को तीन और एमफिल डिग्री वाले को दो विशेष वेतन वृद्धियां दी जाती हैं। स्कूलों में भी पीएचडी और एमफिल डिग्री वाले प्रवक्ता लंबे समय से पढ़ा रहे हैं, मगर उन्हें कोई विशेष वेतन वृद्धियां नहीं दी जाती हैं।
संघ ने मांग की कि स्कूलों में काम कर रहे पीएचडी और एमफिल डिग्री वाले प्रवक्ताओं को भी कॉलेज की तर्ज पर विशेष वेतन वृद्धियां दी जाएं। संघ के उपप्रधान गिरीश ठाकुर, मुख्य सलाहकार मोहिंद्र, मुख्य संगठन सचिव पंकज बख्शी, वेब सचिव नरेश कुमार ने मांग की कि 1986 से लेकर आज तक हर बार सरकार की तरफ से आश्वासन ही मिले हैं। सरकार इस मामले में कोई ठोस नीति बनाए।