हिमाचल राजभवन ने पांच सुझावों के साथ टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। प्रदेश सरकार को भेजे गए पत्र में राजभवन ने कहा है कि सरकार नियमों को कठोरता से लागू करे ताकि भविष्य में अवैध भवन निर्माण न हो। भवन नियमितीकरण के दौरान अभियंता, भवन मालिक और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और सही स्ट्रक्चर वाले भवनों को ही नियमित करने की एडवायजरी जारी की है।
यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि हरित क्षेत्र घोषित भूमि पर अवैध निर्माण को नियमित न किया जाए, साथ ही इस भूमि पर भविष्य में किसी तरह का अवैध निर्माण न हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। राजभवन
ने 24 जनवरी को टीसीपी विधेयक को मंजूरी देने के साथ पांच सुझावों वाला पत्र भी प्रदेश सरकार को भेजा है। इन सुझावों को मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं है, लेकिन अगर पालना की बात आई तो अवैध भवनों को नियमित करना आसान नहीं होगा। हिमाचल में 30 हजार के करीब अवैध भवन हैं। बीते चार सालों में हिमाचल में अंधाधुंध अवैध निर्माण हुआ है।
सरकार को यह एडवाइजरी दी है राजभवन ने
- कानून, तकनीकी, पर्यावरण, सामाजिक, मूलभूत सुविधाओं, परिवहन को ध्यान में रखा जाए।
- न्यायिक आदेशों की अवहेलना न हो, कानून की दृष्टि से भी विधेयक अपने उद्देश्य की पूर्ति करता हो।
- भवन ढांचा अगर सुरक्षित नहीं है, तो भवन मालिक और संबंधित क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।
- अवैध भवन कैसे अस्तित्व में आए। सरकारी तंत्र की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इस तरह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
- वन भूमि, रास्ते में अवैध निर्माण करने वाले भवन नियमित न हो, इन लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो।