हिमाचल में चलने वाले निजी नशा उन्मूलन केंद्र भगवान भरोसे चल रहे हैं। सरकार के पास अपना तो एक भी नशा निवारण केंद्र नहीं है लेकिन निजी संस्थाओं की मदद से चल रहे इन केंद्रों में वर्तमान में कितने लोग हैं और कितनी फीस लेकर किस प्रक्रिया के तहत उन्हें भर्ती किया गया है, इसकी जानकारी भी राज्य सरकार को नहीं है। यह हैरान करने वाली जानकारी विधायक राजेश ठाकुर और आशीष बुटेल के सवाल के लिखित जवाब में दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री की ओर से लिखित जवाब दिया गया कि कुल्लू, धर्मशाला और नूरपुर में तीन इंटीग्रेटेड रीहैबिलिटेशन सेंटर फार एडिक्ट (आईआरसीए) चल रहे हैं, जिन्हें केंद्रीय स्कीम फार असिस्टेंस फार द प्रिवेंशन आफ एल्कोहल एंड ड्रग एब्यूज के तहत वित्तीय सहायता राज्य सरकार दे रही है। वहीं, प्रदेश सरकार किसी भी तरह की फंडिंग ऐसे संस्थानों को चलाने के लिए किसी एनजीओ को नहीं दे रही है।