केंद्र ने तीन साल बाद हिमाचल का पैसा जारी किया, ऊपर से कड़ी शर्तें थोप दींं। हिमाचल प्रदेश के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का साल 2022 का लंबित 50.93 लाख रुपये का बजट अब जाकर हिमाचल सरकार को मिला है। महालेखाकार कार्यालय की ओर से प्रमाणित आंकड़ों को पेश कर इस लंबित राशि के केंद्र में अटके होने की बात उजागर होने के बाद ही यह बजट राज्य सरकार को मिला है। यह बजट वित्त वर्ष अप्रैल से जून 2022 के बीच लंबित रहा है।
यह बजट नॉन प्लान ग्रांट के रूप में जारी किया गया है। इस संबंध में केंद्र सरकार के अवर सचिव मुथूरमन सी ने राज्य सरकार के वित्त सचिव को एक चिट्ठी भेजी है। हिमाचल सरकार की ओर से इस बजट को लेकर केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया था और महालेखाकार कार्यालय की ओर से संबंधित आंकड़ों की गणना की गई थी। जीएसटी की यह प्रतिपूर्ति केंद्रीय करों में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी के अलावा राजस्व घाटों के दावों के बाद की जाती है।
जीएसटी की देय राशि बढ़ी तो होगी रिकवरी
केंद्र सरकार ने इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर किसी तरह से जीएसटी के तहत देय राशि बढ़ गई तो इसकी रिकवरी होगी। केंद्र से जारी की गई यह ग्रांट प्रोविजनल है। अगर कैग की ओर से लेखा परीक्षा से राजस्व के आंकड़े राज्य के लिए जारी की गई राशि के बराबर होंगे तो ऐसे में भविष्य के दावों से ज्यादा दी गई राशि को रिकवर किया जाएगा। इसे राज्य सरकार के खाते से सीधे डेबिट से वसूला जाएगा। यही व्यवस्था जीएसटी के तहत हिमाचल प्रदेश को दी गई अन्य रकम पर भी लागू होगी।