चर्चा का उत्तर मुख्यमंत्री ने भी दिया। कहा कि इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का फोन आया था, लेकिन हमने अपनी मंशा जाहिर की थी कि उनका प्रस्ताव हमें स्वीकार्य नहीं है। वित्त मंत्री का कहना था कि एसजेवीएन प्रोजेक्ट को केंद्र संरक्षित करेगा।
प्रदेश सरकार का मानना है कि एनटीपीसी का हाइड्रो की दृष्टि से अनुभव कम है। एसजेवीएन प्रोजेक्ट को संरक्षित करने को लेकर केंद्र में विचार चल रहा है। मैं प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को सदन में एसजेवीएन प्रोजेक्ट का विलय न करने को लेकर विपक्ष की ओर जाहिर की गई मंशा को बताऊंगा।
चर्चा का प्रस्ताव लाते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल एसजेवीएन लिमिटेड का एनटीपीसी में विलय न होने दे। एसजेवीएन प्रोजेक्ट में हिमाचल का 26.8 फीसदी हिस्सा है। इससे हिमाचल को हर वर्ष 1700 करोड़ का राजस्व लाभ होता है।
प्रोजेक्ट के पास 6700 करोड़ की रिजर्व पूंजी है। तत्कालीन वीरभद्र सरकार के समक्ष भी केंद्र सरकार ने विलय का मामला उठाया था, लेकिन हमारे मंत्रिमंडल ने हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए उसे अस्वीकार कर दिया था।