जवाब में शिक्षा सुरेश भारद्वाज ने बताया कि जनवरी में जनजातीय विकास मंत्री के माध्यम से छात्रवृत्ति में गड़बड़ी की जानकारी मिली। शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच कराई।
मामले में कई बैंक, दूसरे राज्यों में स्थापित शैक्षणिक संस्थान और लोग शामिल थे, ऐसे में घोटाले की पुष्टि के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी लेकर सीबीआई जांच की सिफारिश 4 सितंबर को केंद्रीय कार्मिक विभाग के जरिये गृह मंत्रालय को भेजी। 16 नवंबर को छोटा शिमला थाने में मामला दर्ज कराया।
तब से अब तक शिमला पुलिस मामले की जांच कर रही है। शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक सदन से बाहर चले गए। दस मिनट बाद लौटने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पुलिस तीन दिन में जांच पूरी कर लेगी। इसके बाद रिपोर्ट सीबीआई को भेज दी जाएगी।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सरकार के सुस्त रवैये पर नेगी के सवाल उठाने पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार घोटालेबाजों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने तक शांत नहीं बैठेगी। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के पूछने पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि जांच में कई संस्थानों के नाम सामने आए हैं, जिनमें हिमालयन टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट और आईटीएफटी प्रमुख हैं।
नीरव-चौकसी की तरह भाग जाएंगे आरोपी
नेगी ने कहा कि सरकार जिस तरह मामले की जांच में देरी कर रही है, उससे लग रहा है जैसे सरकार हजारों करोड़ लेकर भागने वाले नीरव-चौकसी की तरह छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपियों के भी भागने का इंतजार कर रही है। शिक्षा मंत्री ने पलटवार करते कहा कि यह घोटाला भी पिछली सरकार के दौरान हुआ और नीरव-चौकसी वाला भी। मोदी और सूबे की जयराम सरकार ने तो इन घोटालों का पर्दाफाश किया है।