सरकार ने 13 फरवरी को आयोजित बैठक में निर्णय लिया कि 15 नवंबर, 2016 की अधिसूचना के तहत विभाग प्रदेश में दवा बनाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता देते हुए उनसे दवाइयों की खरीद की जाएगी। साथ ही सूबे की दवा कंपनियों से दवा खरीदते समय प्रदेश उद्योग विभाग से प्रमाण भी देना होगा।
इन सभी औपचारिकताओं पर विचार-विमर्श करने के बाद भी विभाग ने टेंडर रद्द कर दिए। उधर, प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर ने बताया कि विभाग नए सिरे से दवाइयों के लिए शीघ्र टेंडर आमंत्रित करेगा। अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं आने दी जाएगी।